सिंदूर से परिवार के संबंध ही नहीं, वास्तुदोष के साथ आर्थिक तंगी भी हो सकती है दूर, जानिए कैसे करें इसका उपयोग
- Written By: नवभारत डेस्क
-सीमा कुमारी
हिंदू धर्म में सिंदूर का बड़ा महत्व है। सुहागिन महिलाएं इससे मांग भरती हैं तो पूजा-पाठ में भी इसका उपयोग किया जाता है। ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, टोटके और तंत्र-मंत्र में तो सिंदूर का प्रमुख रूप से उपयोग होता है। मान्यता है कि, ये टोटके-उपाय जीवन की तमाम परेशानियों को दूर कर देते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं। आइए जानें सिंदूर के प्रभावी टोटके।
ज्योतिष-शास्त्र के मुताबिक, जीवन के तमाम संकटों से निजात पाने के लिए और आने वाले संकटों से बचाव करने के लिए हनुमानजी को 5 मंगलवार और 5 शनिवार को चमेली का तेल और सिंदूर अर्पित करें। साथ ही गुड़ और चने की प्रसाद बांटें।
सम्बंधित ख़बरें
Breaking News: जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में बड़ा धमाका, एक की मौत; कई गंभीर रूप से घायल
Weekly Horoscope : जून के आखिरी सप्ताह में बदलेगी इन राशियों की किस्मत, जानें मेष से मीन का साप्ताहिक राशिफल
‘महेश भट्ट मेरे पिता समान हैं’, अनु मलिक ने रिश्ते पर कही दिल छू लेने वाली बात, बयान ने जीता दिल
सेशेल्स में PM मोदी की ‘कार डिप्लोमेसी’ ने बटोरी सुर्खियां, गुजराती लोकनृत्य से गूंजा भारतीय संस्कृति का रंग
अगर घर में वास्तुदोष है तो दरवाजे पर रोज सुबह सिंदूर लगाएं। ऐसा करने से नकारात्मकता खत्म होगी। वहीं घर के मुख्य द्वार पर सिंदूर चढ़ी गणेशी की फोटो भी लगाएं। इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि रहती है।
वास्तु-शास्त्र के अनुसार, हिंदू धर्म में स्वास्तिक के चिह्न को बहुत शुभ माना जाता है। प्रत्येक शुभ कार्य और पूजा अनुष्ठान में स्वास्तिक अवश्य बनाते हैं। यदि आपके घर में झगड़े की स्थिति बनी रहती है या जीवनसाथी के साथ संबंधों में परेशानियां चल रही हैं तो सिंदूर में थोड़ा तेल मिलाकर अपने घर के मुख्य दरवाजे पर स्वास्तिक का निशान बनाएं। इस कार्य को लगातार 40 दिनों तक करना है। इससे आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और खुशहाली आती है।
ज्योतिषियों का मानना है कि, कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होने से व्यक्ति को यश-कीर्ति प्राप्ति होती है, साथ ही पिता-पुत्र के संबंध में मधुरता और मजबूती आती है। यदि आप यश-कीर्ति प्राप्त करना चाहते हैं या आपके पिता के साथ संबंध में समस्याएं हैं तो तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें चुटकी भर सिंदूर मिलाकर प्रतिदिन सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
