Indian Silk Sarees: बनारसी से कांजीवरम तक, हर महिला की अलमारी में जरूर होनी चाहिए ये 10 शाही सिल्क साड़ियां

Must Have Silk Sare: भारत में साड़ी सिर्फ एक परिधान नहीं, बल्कि परंपरा, संस्कृति और शान की पहचान है। शादी-ब्याह से लेकर तीज-त्योहार यानू हर छोटे-बड़े फंक्शन में महिलाएं साड़ी को गर्व से पहनती हैं।
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सिल्क साड़ी (फोटो.सोशल मीडिया)
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Indian Silk Sarees: भारत के हर राज्य की अपनी बुनाई है और अपनी साड़ी है। इन सबमें सिल्क की साड़ियां एक अलग स्थान रखती हैं। जब भी किसी की शादी होती है, तो उस वेडिंग वार्डरोब में कुछ सिल्क की साड़ियां जरूर होती है, जो सालों साल चलती हैं।

एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक और इनकी खास बात है कि यह कभी भी आउट ऑफ फैशन नहीं होती है। आज बात करेंगे 10 ऐसी साड़ियों के बारे में जो आपकी अलमारी में जरूर होनी चाहिए।

बनारसी सिल्क साड़ी (उत्तर प्रदेश)

साड़ियों में बनारसी साड़ी का नाम सबसे ऊपर आता है। वाराणसी में बनने वाली इन साड़ियों में सोने की परतों का इस्तेमाल किया जाता है। साड़ियों के पल्लू से लेकर बॉर्डर तक में रेशम के धागों के साथ सोने-चांदी की तारे पिरोई जाती है। एक बनारसी साड़ी को तैयार करने में 15 दिन से लेकर 6 महीने तक का समय लगता है। बनारस की साड़ियों की मांग पूरे विश्व भर में होती है। विश्वभर में इसकी बूटेदार डिजाइन, मुगल शैली की बेल बुटियां और हाथ की महीन कारीगरी इसे अलग पहचान देती हैं।

सिल्क साड़ी (फोटो.सोशल मीडिया)
सिल्क साड़ी (फोटो.सोशल मीडिया)

कांजीवरम सिल्क साड़ी (तमिलनाडु)

तमिलनाडु के कांचीपुरम शहर में बनने वाली कांजीवरम साड़ी को 'साड़ियों की रानी' कहा जाता है। मलबरी सिल्क के धागों से तैयार की जाने वाली इन साड़ियों का बॉर्डर चौड़ा होता है। इसमें असली जरी का इस्तेमाल किया जाता है।

भागलपुरी सिल्क (बिहार)

बिहार के भागलपुर को 'सिल्क सिटी' कहा जाता है। भागलपुरी सिल्क को दुनिया भर में उसके नेचुरल टेक्सचर के लिए जाना जाता है। भागलपुरी सिल्क को GI टैग भी मिला हुआ है।

सिल्क साड़ी (फोटो.सोशल मीडिया)
सिल्क साड़ी (फोटो.सोशल मीडिया)

मूंगा सिल्क (असम)

असम की मूंगा सिल्क दुनिया की सबसे दुर्लभ रेशम के कीड़े से बने धागों से बनाई जाती है। मूंगा रेशम विशेष कीड़ों से प्राप्त होता है, जो केवल असम के मौसम में पनपते हैं। ये सिल्क इसलिए भी खास है क्योंकि इसकी प्राकृतिक सुनहरी चमक कभी फीकी नहीं पड़ती और ये हमेशा नए की तरह ही दिखते हैं।

सिल्क साड़ी (फोटो.सोशल मीडिया)
सिल्क साड़ी (फोटो.सोशल मीडिया)

पैठणी सिल्क (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र की पैठणी साड़ी कोई ऐसी-वैसी साड़ी नहीं है, इसे तैयार करने में एक साल से अधिक का समय लगता है। महाराष्ट्र के बुनकरों के हाथों का कमाल इस साड़ी के पल्लू से लेकर बॉर्डर तक में झलकता है।

बालूचरी सिल्क (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल की बालूचरी साड़ियों पर पौराणिक कथाओं जैसे- रामायण, महाभारत और लोककथाओं के दृश्य बुने जाते हैं। बालूचरी सिल्क को भी GI टैग का दर्जा मिला हुआ है। इसकी कीमत 25 हजार से 2 लाख रुपए या उससे अधिक भी हो सकती है।

सिल्क साड़ी (फोटो.सोशल मीडिया)
सिल्क साड़ी (फोटो.सोशल मीडिया)

पटोला सिल्क (गुजरात)

पटोला भारत की सबसे मुश्किल डबल इकट बुनाई वाली साड़ियों में शामिल है। इसके धागों को पहले रंगा जाता है, फिर डिजाइन के अनुसार बुना जाता है। एक साड़ी बनाने में कई महीने लग सकते हैं। पटोला को भी GI मान्यता प्राप्त है।

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