‘काल भैरव जयंती’ के दिन अवश्य खिलाएं काले कुत्ते को भोजन, अकस्मात संकटों से मिलेगी मुक्ति
- Written By: नवभारत डेस्क
-सीमा कुमारी
हर साल मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ‘काल भैरव जयंती’ (Kaal Bhairav Jayanti) जयंती मनाई जाती है। इस साल यह जयंती आज यानी 16 नवंबर, बुधवार को मनाई जाएगी।
देवों के देव महादेव के कई अवतार हैं। इन्हीं में से एक है उनका रौद्र रूप जिन्हें ‘काल भैरव’ के नाम से जाना जाता है। यूँ तो हर माह कालाष्टमी आती है लेकिन कहते हैं कि मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शिव ने ‘काल भैरव’ का रूप धारण किया था। यह काल भैरव जयंती कहलाती है। शत्रु और ग्रह बाधा दूर करने के लिए काल भैरव की पूजा बहुत उत्तम मानी गई है। आइए जानें काल भैरव जंयती की डेट, पूजा का मुहूर्त और महिमा –
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शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि आरंभ- 16 नवंबर को सुबह 5 बजकर 49 मिनट पर
अष्ठमी तिथि समाप्त- 17 नवंबर को सुबह 7 बजकर 57 मिनट पर
पूजन विधि
- काल भैरव जयंती के दिन अष्टमी तिथि में सुबह स्नान आदि नित्यकर्म से निवृत होकर पहले स्नान करें।
- स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और इसके बाद भगवान शिव के समक्ष दीपक जलाएं और उनका पूजन करें।
- काल भैरव की पूजा का उचित समय रात का होता है. ऐसे में इस दिन रात के शुभ मुहूर्त में काल भैरव की विशेष पूजा-अर्चना करें।
- शाम को किसी मंदिर में जाएं और भगवान भैरव की प्रतिमा के सामने चौमुखी दीपक जलाएं।
- इसके साथ ही भगवान को फूल, इमरती, जलेबी, उड़द, पान नारियल आदि चीजें अर्पित करें।
- इसके बाद वहीं आसन पर बैठकर काल भैरव भगवान का चालीसा का पाठ करें।
- पूजा संपन्न होने के बाद आरती करें और जानें-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
महिमा
‘काल भैरव जयंती’ पर महादेव के रौद्र रूप की पूजा से भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। भैरव शब्द का अर्थ है रक्षा करने वाला।
इन्हें दंडपाणि की उपाधि दी गई है। कहते हैं अच्छे कर्म करने वालों पर काल भैरव मेहरबान रहते हैं लेकिन जो अनैतिक कार्य करता है उन्हें वह उनके प्रकोप से बच भी नहीं पाता। काल भैरव का वाहन कुत्ता माना गया है।
मान्यता है कि, काल भैरव को प्रसन्न करना है तो काल भैरव जयंती के दिन विशेषकर काले कुत्ते को भोजन खिलाना चाहिए। इससे आकस्मिक संकटों से काल भैरव रक्षा करते है। वहीं जो इस दिन मध्यरात्रि में चौमुखी दीपक लगाकर भैरव चालीसा का पाठ करता है उसके जीवन में शनि और राहु के अशुभ प्रभाव कम हो जाते हैं।
