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लंबे समय तक संक्रमण की वजह बनता है लॉन्ग कोविड, स्टडी में हुआ नया खुलासा
- Written By: दीपिका पाल
कोरोना वायरस संक्रमण से ग्रस्त लगभग 5-10 प्रतिशत लोग लंबे समय तक कोविड का सामना करते हैं, जिसके लक्षण तीन महीने या उससे अधिक समय तक रहते हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने लंबे समय तक कोविड रहने की व्याख्या करने के लिए कई जैव प्रणालियां प्रस्तावित की हैं।

लंबे समय का कोरोना (सौ.सोशल मीडिया)
मेलबर्न: कोरोना वायरस संक्रमण से ग्रस्त लगभग 5-10 प्रतिशत लोग लंबे समय तक कोविड का सामना करते हैं, जिसके लक्षण तीन महीने या उससे अधिक समय तक रहते हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने लंबे समय तक कोविड रहने की व्याख्या करने के लिए कई जैव प्रणालियां प्रस्तावित की हैं। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के नवीनतम मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक आलेख में, हमारा तर्क है कि यदि सभी नहीं तो अधिकतर लोगों में लंबे समय तक कोविड का होना शरीर में वायरस के लंबे समय तक बने रहने से जुड़ा प्रतीत होता है।
महामारी की अपेक्षाकृत शुरुआती अवधि से, यह मान्यता रही है कि कुछ लोगों में, सार्स-सीओवी-2 वायरस या कम से कम उसके अवशेष लंबे समय तक विभिन्न ऊतकों और अंगों में बने रह सकते हैं। इस सिद्धांत को ‘वायरल परसिस्टेंस’ के रूप में जाना जाता है। कुछ लोगों के शरीर में वायरस के अवशेषों की दीर्घकालिक उपस्थिति की बात अच्छी तरह से प्रमाणित हो चुकी है, लेकिन कम निश्चित बात यह है कि क्या कोई जीवित वायरस लंबे समय तक बने रहता है और यदि ऐसा है, तो क्या यही लंबे समय तक कोविड का कारण है। यह भेद करना महत्वपूर्ण है क्योंकि जीवित वायरस को विशिष्ट एंटीवायरल तरीकों से लक्षित किया जा सकता है जबकि ‘मृत’ वायरस अवशेषों के साथ ऐसा नहीं किया जा सकता।
‘वायरल परसिस्टेंस’ यानी विषाणु के बने रहने के दो महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। जब यह कुछ अत्यधिक प्रतिरक्षाविहीन लोगों में होता है, तो इसे नए और काफी अलग दिखने वाले स्वरूप का स्रोत माना जाता है, जैसे कि जेएन.1। दूसरा, इसमें व्यापक आबादी में कई लोगों में तीव्र बीमारी के बाद भी लक्षण पैदा करने की क्षमता होती है। दूसरे शब्दों में, लंबे समय तक संक्रमण के कारण दीर्घकालिक कोविड हो सकता है।
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अनुसंधान क्या कहता है?
ऐसा कोई अध्ययन तो नहीं है जो पुष्टि करता हो कि लगातार वायरस का संक्रमण दीर्घकालिक कोविड का कारण है, लेकिन सामूहिक रूप से कई हालिया प्रमुख शोधपत्र इस संबंध में एक इशारा करते हैं। फरवरी में, ‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि कोविड के हल्के लक्षणों वाले बहुत से लोगों में वायरस की आनुवंशिक सामग्री, तथाकथित वायरल आरएनए उनके श्वसन मार्ग से लंबे समय तक निकलते रहे। इस वायरल आरएनए के लगातार निकलने वाले लोगों में लंबे समय तक कोविड रहने का अधिक जोखिम था। अन्य प्रमुख शोधपत्रों में रोगियों के रक्त में उनके प्रारंभिक संक्रमण के कुछ वर्ष बाद वायरल आरएनए और प्रोटीन की प्रतिकृति का पता चला। यह संकेत है कि वायरस संभवतः शरीर में कुछ छिपे हुए हिस्सों में लंबे समय तक प्रतिकृति बना रहा है, जिसमें संभवतः रक्त कोशिकाएं भी शामिल हैं।
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वायरल आरएनए का चला पता
एक अन्य अध्ययन में तीव्र संक्रमण के एक से चार महीने बाद दस अलग-अलग ऊतक स्थलों और रक्त के नमूनों में वायरल आरएनए होने का पता चला। इस अध्ययन में पाया गया कि लगातार ‘पोजिटिव’ वायरल आरएनए वाले लोगों में लंबे समय तक कोविड (संक्रमण के चार महीने बाद मापा गया) का जोखिम अधिक था। इसी अध्ययन ने इस बारे में भी संकेत दिए कि शरीर में लंबे समय तक बने रहने वाला वायरस कहां रहता है।
जठरांत्र या पाचन तंत्र संबंधी मार्ग दीर्घकालिक वायरस के छिपने के लिए प्रमुख स्थान माना जाता है। इस बात का औपचारिक प्रमाण कि प्रतिकृति बनाने में सक्षम वायरस शरीर में वर्षों तक रह सकता है, अभी भी अस्पष्ट है। ऐसा इसलिए है क्योंकि शरीर के अंदर ऐसे स्थानों से जीवित वायरस को अलग करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है जहां यह ‘छिपा’ रहता है। इसके अभाव में, हम और अन्य वैज्ञानिक तर्क देते हैं कि कुल मिलाकर साक्ष्य अब कार्रवाई को गति प्रदान करने के लिए प्रेरित करते हैं।
अब आगे क्या करना होगा?
इसका स्पष्ट उत्तर लंबे समय तक कोविड की रोकथाम और उपचार के लिए ज्ञात एंटीवायरल के परीक्षणों में तेजी लाना है। इसमें मधुमेह की दवा मेटफॉर्मिन आदि को शामिल करना चाहिए। दीर्घकालिक कोविड के संदर्भ में इसके संभावित दोहरे लाभ हैं। इनमें इसके एंटीवायरल गुण शामिल हैं जिन्होंने दीर्घकालिक कोविड के खिलाफ आश्चर्यजनक प्रभाव का प्रदर्शन किया है। थकान से संबंधित दुर्बलताओं के उपचार में एक संभावित चिकित्सा पद्धति के रूप में भी इसे सहायक माना गया। हालांकि, नई दवाओं के विकास और तेजी से परीक्षण के लिए नैदानिक परीक्षण मंचों की स्थापना पर होना चाहिए। विज्ञान ने कई उत्साहजनक चिकित्सीय विकल्प प्रदान किए हैं, लेकिन इन्हें क्लिनिक में उपयोग करने योग्य रूपों में बदलना एक बड़ी बाधा है जिसके लिए सरकारों से समर्थन और निवेश की आवश्यकता होती है।
दीर्घकालिक कोविड को समझना और रोकना
लंबे समय तक कोविड में ‘लंबे समय तक संक्रमण’ की धारणा काफी मजबूत है। यह व्यापक समुदाय की नजर में स्थिति को समझने में मदद कर सकती है और आम जनता के साथ-साथ चिकित्सा पेशेवरों के बीच जागरूकता बढ़ा सकती है।इससे समुदाय में पुनः संक्रमण की दरों को कम करने के महत्व के बारे में जागरुकता बढ़ाने में मदद मिलनी चाहिए। केवल पहली बार हुआ कोविड संक्रमण नहीं, बल्कि बाद में होने वाला प्रत्येक संक्रमण दीर्घकालिक कोविड के लिए जोखिम वाला होता है।
दीर्घकालिक कोविड आम है और यह केवल गंभीर तीव्र बीमारी के उच्च जोखिम वाले लोगों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सभी आयु समूहों को प्रभावित करता है। एक अध्ययन में, सबसे अधिक प्रभाव 30 से 49 वर्ष की आयु के लोगों में देखा गया। इसलिए, अभी के लिए, हम सभी को उपलब्ध साधनों के साथ वायरस से अपने संपर्क को कम करने की आवश्यकता है। इसके लिए हवादार भीतरी स्थानों पर रहना, खिड़कियां खोलकर रखना, भीतरी हिस्सों में वायु को सुरक्षित बनाने के अधिक परिष्कृत तरीकों में उन स्थानों में वायु की गुणवत्ता पर निगरानी रखना और उसे फिल्टर करना शामिल है, जहां प्राकृतिक रूप से आसानी से हवा की आवाजाही नहीं हो सकती।
कोरोना का उपचार जरूरी
जिन स्थानों पर आपको, खासतौर पर भीड़भाड़ होने की वजह से भीतर हवा की गुणवत्ता को लेकर भरोसा नहीं हो, वहां उच्च गुणवत्ता वाले मास्क (जो अच्छी तरह से फिट होते हैं और आसानी से हवा को अंदर नहीं आने देते, जैसे कि एन95 प्रकार के मास्क) का उपयोग किया जा सकता है। चिकित्सा जांच कराना भी एक तरीका है ताकि आपको पता चले कि आप कब संक्रमित हैं। जांच में यदि संक्रमण का पता चले तो उपचार कराया जा सकता है।
इसके साथ ही आप अपने आस-पास के लोगों को मास्क के साथ सुरक्षित रखने, जहां तक संभव हो घरों पर रहने और स्थानों को हवादार बनाने के बारे में सतर्कता रख सकते हैं। कोविड रोधी टीके की बूस्टर खुराक भी महत्वपूर्ण निवारक है। टीके लंबे समय तक कोविड रहने और उसके बाद की जटिलताओं को कम करते हैं। उम्मीद है कि एक दिन दीर्घकालिक कोविड के लिए बेहतर उपचार होगा। लेकिन इस बीच, दीर्घकालिक कोविड के जैवचिकित्सा आधार के बारे में बढ़ती जागरूकता से चिकित्सकों को रोगियों को अधिक गंभीरता से लेने के लिए प्रेरित होना चाहिए।
एजेंसी इनपुट के अनुसार
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