'भाजपा को शासन नहीं, खुद की सत्ता प्यारी है', मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर कांग्रेस का हमला

Gaurav Gogoi On BJP: मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार जनहित नहीं, बल्कि अपनी सत्ता बचाने में लगी हुई है।
Congress attacks Modi government over its 12-year tenure; Gogoi says the BJP values ​​its own power more than governance.
गौरव गोगोई (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Gaurav Gogoi Attacks Modi Government Tenure: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पद पर रहते हुए 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जहां भाजपा और उसके सहयोगी दल उपलब्धियों का जश्न मना रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का फोकस जनकल्याण, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास पर नहीं, बल्कि भाजपा जनहित के मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय विपक्षी दलों को कमजोर करने में लगी हुई है।

उन्होंने कहा कि देश की जनता महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और आर्थिक चुनौतियों जैसे अहम मुद्दों से जूझ रही है, लेकिन सरकार इन समस्याओं के समाधान के बजाय अपने कार्यकाल का जश्न मना रही है।

मंत्रियो को जिम्मेंदारियां देनी चाहिए

गौरव गोगोई ने कहा, "सरकार बनने के बाद मंत्रियों को जिम्मेदारियां देनी चाहिए, उन्हें काम सौंपना चाहिए, रोजगार के अवसर पैदा करने चाहिए, नई नीतियां बनानी चाहिए और बजट के माध्यम से विकास की दिशा तय करनी चाहिए। लेकिन भाजपा इन कामों को छोड़कर विपक्ष को कमजोर करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने में व्यस्त दिखाई देती है।"

भाजपा को शासन नहीं सत्ता की चिंता है

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लोकतंत्र की भावना को कमजोर करना चाहती है। भाजपा को शासन से अधिक खुद की सत्ता की चिंता है। देश के लोग आज कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग जानना चाहते हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें कब कम होंगी। युवाओं की सबसे बड़ी चिंता रोजगार है। यदि देश में पर्याप्त नौकरियां नहीं मिलेंगी तो क्या उन्हें रोजगार के लिए विदेश जाना पड़ेगा।

शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

गौरव गोगोई ने देश के शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्र इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उन्हें भारत के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सीटें नहीं मिल रही हैं। उन्होंने आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि व्यापारी रुपए की गिरती कीमत पर नजर रखे हुए हैं और सोच रहे हैं कि यह आगे कितना कमजोर होगा।

वहीं, निवेशक भी यह विचार कर रहे हैं कि भारत में निवेश करना बेहतर होगा या किसी दूसरे देश में। धनी लोग भी विभिन्न कारणों से विदेशों में बसने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं।

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