पीतल का सूरज घर में लगाने के नियम (सोशल मीडिया)
नवभारत डिजिटल टीम: घर की खुशहाली के लिए भगवान की पूजा के साथ ही वास्तु के नियमों (Vastu Jyotish Tips) का पालन करना सही होता है। घर में वास्तु के अनुसार अगर आप कोई चीज रखते हैं तो आपको इससे सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। अगर आप वास्तु नियमों के अनुसार अपने घर में पीतल का सूरज (Brass Sun) लगाते हैं तो नई ऊर्जा का आगमन होता है। बर्शते यह सही दिशा में लगे होना चाहिए।
यहां पर वास्तु के अनुसार, पीतल का सूरज या पीतल की धातु को गुरु बृहस्पति की धातु कहा जाता है। अगर हम पीतल का सूरज घर में लगाएगें तो गुरु बृहस्पति का वास होकर आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा आपके जीवन में गुरू ग्रह की पूर्ण कृपा बनी रहती है। यही नहीं गुरु और सूर्य की ऊर्जा के संयोजन से घर में प्रवेश करने वाली ऊर्जा कई गुना तक बढ़ जाती है और किसी भी बुरी शक्ति का नाश होता है। सूरज की किरणों से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
यहां पर अगर आप पीतल का सूरज लगाना चाहते हैं तो आपको वास्तु नियमों के अनुसार सही दिशा का चुनाव कर लेना जरूरी है। पीतल के सूर्य को रखने के लिए सबसे अच्छी जगह कमरे की पूर्वी दीवार होती है। पूर्व उगते सूरज की दिशा है और यह नई शुरुआत, विकास और समृद्धि से जुड़ी है। इस तरह लगाने से नई ऊर्जा का संचार होता है और घर में खुशहाली बनी रहती है।
इस पीतल के सूरज को लगाने के लिए आप दक्षिण दिशा को नहीं चुनें। दक्षिण दिशा को अग्नि तत्व की दिशा माना जाता है और यह क्रोध और संघर्ष से जुड़ी होती है। यह एक तरह से नकारात्मक दिशा मानी जाती है जिससे घर में बेवजह के झगड़े होते रहते है।
यहां पर आपके घर के लिए पीतल और तांबा दोनों तरह का सूर्य ही सही होता है। घर में नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालने के लिए ये दोनों धातु का अलग महत्व होता है। इन धातुओं के सूरज को सूर्य की आकृति का बनाया जाता है जिससे इनमें सौर्य ऊर्जा को अवशोषित किया जा सके और घर के सभी स्थानों से नकारात्मकता को दूर किया जा सके।