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‘महाशिवरात्रि’ पर पार्थिव पूजन का लाभ जानिए, जानें पूजा-विधि और उपाय

  • Written By: नवभारत डेस्क
Updated On: Feb 28, 2022 | 07:50 AM

PIC: Instagram

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-सीमा कुमारी

औढरदानी भगवान शिव को समर्पित ‘महाशिवरात्रि’ (Mahashivratri) का पावन पर्व सबसे शुभ और उत्तम माना जाता हैं। यही कारण है कि, शिव भक्त पूरे साल’ महाशिवरात्रि’ महापर्व के आने का बेस्रबी से इंतजार करते हैं। ‘महाशिवरात्रि’ तमाम तरह की मनोकामनाओं को शिव पूजन के माध्यम से पूरा करने का पर्व हैं। यही कारण है कि शिव भक्त अपनी-अपनी कामनाओं के अनुसार महाशिवरात्रि पर अलग-अलग प्रकार के शिवलिंग का अभिषेक और पूजन करता हैं। मान्यता है कि, महाशिवरात्रि पर पार्थिव शिवलिंग की पूजा अर्चना करने पर शिव के साधक की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं। आइए जानें महाशिवरात्रि पर देवों के देव महादेव का वरदान दिलाने वाली पार्थिव पूजा की महिमा –

सनातन परंपरा में भगवान शिव की जितने भी प्रकार से पूजा की विधियां बताई गई हैं, उनमें पार्थिव पूजा का अत्यंधिक महत्व हैं। शिव पुराण में भगवान शिव की साधना-आराधना में पार्थिव (मिट्‌टी) शिवलिंग पूजन को सभी मनोकामनाओं को शीघ्र पूरा करने वाला बताया गया हैं। पार्थिव शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा करने पर सुख-समृद्धि, धन-धान्य, आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती हैं। 

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मान्यता है कि, भगवान शिव से जुड़े पावन दिन, तिथि, काल और रात्रि में पार्थिव पूजन करने पर शिव साधक को कई गुना फल प्राप्त होता हैं। मान्यता यह भी है कि पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से करोड़ों यज्ञों के समान फल भी मिलता हैं। ऐसे में भगवान शिव से जुड़े महापर्व यानि महाशिवरात्रि पार्थिव पूजन का फल और भी बढ़ जाता हैं।

भगवान शिव के पार्थिव पूजन का महत्व इस तरह से भी समझा जा सकता है कि भगवान श्री राम (Lord Ram) ने भी रावण पर विजय पाने से पहले समुद्र तट पर भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए विशेष रूप से पार्थिव शिवलिंग का पूजन किया था। मान्यता यह भी है कि नवग्रहों में से एक शनिदेव ने भी अपने पिता सूर्यदेव से ज्यादा शक्ति पाने के लिए काशी में पार्थिव शिवलिंग बनाकर विशेष पूजा की थी।

पार्थिव शिवलिंग हमेशा स्नान-ध्यान करने के बाद किसी पवित्र मिट्टी जैसे गंगा, यमुना या फिर गोदावरी आदि नदी के किनारे से प्राप्त की गई मिट्टी से बनाया जाता हैं।   किसी पवित्र नदी की मिट्टी को लाने के बाद सबसे पहले उसे छान करके शुद्ध कर लें और उसके बाद उसमें गाय का गोबर, गुड़, मक्खन और भस्म मिलाकर शिवलिंग बनाएं. पार्थिव लिंग एक या दो तोला मिट्टी लेकर अंगूठे के बराबर हाथ से बनाया जाता हैं। 

पार्थिव शिवलिंग बनाते समय आपका मुह हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए, पार्थिव शिवलिंग बनाते समय भगवान शिव के मंत्र का जाप करते रहें। पार्थिव शिवलिंग तैयार हो जाने के बाद सबसे पहले गणपति की पूजा करें उसके बाद भगवान विष्णु, नवग्रह और माता पार्वती आदि का आह्वान करें। इसके बाद पार्थिव शिवलिंग की बेलपत्र, आक के फूल, धतूरा, बेल, कच्चे दूध आदि से पूजा करें।

Know the benefits of worshiping the parthiv shivling earth on mahashivratri 2022

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Published On: Feb 28, 2022 | 07:50 AM

Topics:  

  • Lord Shiva

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