World Earth Day 2025: एक जोड़ी जींस बनाने में लगता है 7,500 लीटर पानी, जानें विश्व धरती दिवस पर ये खास तरह का क्लोदिंग ट्रेंड
विश्व धरती दिवस के दिन पर्यावरण संरक्षण और पृथ्वी को बचाने का संकल्प लिया जाता है। धरती की सुरक्षा महज एक जिम्मेदारी नहीं है हर नागरिक को अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध बनाना जरूरी है।
- Written By: दीपिका पाल
विश्व पृथ्वी दिवस 2025 (सौ.सोशल मीडिया)
World Earth Day 2025: हमारी धरती सुरक्षित और संरक्षित रहे देश के हर नागरिक का कर्तव्य होता है। धरती एक ऐसा ग्रह है जो समस्त मानव से लेकर समस्त जीव जंतुओं को अपने में समेटे हुए है। धरती की उपयोगिता और मूल्यों को बताने के लिए दुनियाभर में हर साल 22 अप्रैल यानि आज विश्व धरती दिवस मनाया जाता है। इस दिन को इंटरनेशनल मदर अर्थ डे के रूप में भी जाना जाता है. इसे मनाने का मकसद यही है कि लोग पृथ्वी के महत्व को समझें और पर्यावरण को बेहतर बनाए रखने के प्रति जागरूक हों. यही वजह है कि इस दिन पर्यावरण संरक्षण और पृथ्वी को बचाने का संकल्प लिया जाता है। धरती की सुरक्षा महज एक जिम्मेदारी नहीं है हर नागरिक को अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध बनाना जरूरी है।
जानिए क्या है विश्व धरती दिवस का इतिहास
इस दिवस यानि विश्व धरती दिवस को मनाने का उद्देश्य धरती की उपयोगिता को समझना है तो वहीं पर विश्व धरती दिवस ग्लोबल स्तर पर मनाया जाता है। इस दिवस की शुरूआत, 60-70 के दशक में जंगलों और पेड़ों की अंधाधुन्ध कटाई को देखते हुए सितम्बर 1969 में सिएटल, वाशिंगटन में एक सम्मलेन में विस्कोंसिन के अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने इसे मनाने की घोषणा की गई। यहां पर इस दिवस को राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन में अमेरिका के स्कूल और कॉलेजों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और इस सम्मेलन में 20 हजार से अधिक लोग इक्कट्ठा हुए। जहां पर 1970 से हर साल 22 अप्रैल को विश्व धरती दिवस मनाया जा रहा है।
जानिए क्या होता है अपसाइकल्ड क्लोदिंग
यहां पर हम अपसाइकल्ड क्लोदिंग की बात करें तो, यह एक तरह का ऐसा ट्रेंड है जिसमें पुराने या बेकार हो चुके कपड़ों को नया रूप देकर फिर से पहनने लायक बनाया जाता है। बताया जाता है कि, इस ट्रेंड में कपड़े पूरी तरह से नए जैसे लगते हैं और इनका रंग भी सॉलिड होता है। वहीं पर क्लोदिंग की इस तकनीक की बात करें तो, जब हम पुराने कपड़ों को फेंकने की बजाय उन्हें नया डिजाइन देकर दोबारा इस्तेमाल करते हैं, तो इसे Upcycled Clothing Trends कहते हैं। जैसे पुरानी जींस को काटकर शॉर्ट्स बना लेना, या पुराने दुपट्टे से एक स्टाइलिश टॉप तैयार कर लेना. इससे कपड़े बेकार नहीं होते और फैशन भी बना रहता है। इस ट्रेंड को अपनाने के पीछे की वजह यह सामने आई कि, कपड़ों के कचरे को लैंडफिल में डंप किया जाता है, जिससे मीथेन गैस निकलती है. इस तरह से ये समुद्री जीवन, मिट्टी और जल सभी को प्रदूषित करते हैं।
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अपसाइकल्ड क्लोदिंग (सौ. सोशल मीडिया)
इसलिए फायदेमंद है अपसाइकल्ड क्लोदिंग
आपको बताते चलें कि, अपसाइकल्ड क्लोदिंग का ट्रेंड अपनाने से कई फायदे मिलते है। कहते हैं कि, जब हम पुराने कपड़े फेंकते हैं, तो वे लैंडफिल में जाकर मिट्टियों के साथ कैमिकल रिएक्शन करते हैं, जिससे मीथेन गैस बनती है। जब यह गैस पर्यावरण में फैल जाए तो नुकसान पर्यावरण को होता है। अपसाइकलिंग से पानी और बिजली की बचत होती है. नए कपड़े बनाने में बहुत पानी और एनर्जी लगती है. पुराने कपड़े दोबारा इस्तेमाल करने से ये बच जाता है।बहुत से छोटे डिजाइनर और टेलर अपसाइकलिंग करते हैं, जिससे उनका घर चलता है।
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जानिए रिसर्च में क्या हुआ खुलासा
1- Ellen MacArthur Foundation की एक रिपोर्ट के अनुसार, हर सेकंड दुनिया में एक ट्रक भर कपड़े या तो जलाए जाते हैं या लैंडफिल (कचरे के ढेर) में डाल दिए जाते हैं. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि फैशन इंडस्ट्री दुनिया के सबसे बड़े प्रदूषकों में से एक बन चुकी है।
2- UNEP (United Nations Environment Programme) के मुताबिक, एक जोड़ी जींस बनाने में लगभग 7,500 लीटर पानी लगता है, जो एक इंसान की 7 साल की पानी की जरूरत के बराबर है।
3- Fashion Revolution की रिपोर्ट के अनुसार अगर लोग केवल अपने कपड़ों को 9 महीने ज्यादा पहनें, तो इससे कार्बन उत्सर्जन, वाटर वेस्ट और पॉल्यूशन में 20-30% की कमी आ सकती है।
