Parenting Tips: जिद्द और गुस्से से हैं परेशान? इशिता दत्ता के इस पेरेंटिंग हैक से बदल जाएगा बच्चे का बर्ताव!

Parenting Advice: बच्चों की जिद्द और गुस्सा अक्सर माता-पिता के लिए चुनौती बन जाता है। ऐसी स्थिति में डांटने की बजाय सही तरीके से समझाना ज्यादा असरदार हो सकता है।
Parenting Tips To Handle Child Anger And Stubborn Behavior
जिद्दी बच्चा और बच्चे को संभालती एक्ट्रेस (सौ. फ्रीपिक और इंस्टाग्राम)
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How To Handle Stubborn Child: पैरेंटिंग जितनी खूबसूरत होती है उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है। खासकर जब बच्चा 2 से 3 साल का हो तो उसकी जिद को संभालना किसी परीक्षा से कम नहीं होता है। एक्ट्रेस इशिता दत्ता ने अपनी मदरहुड जर्नी से कुछ ऐसे नायाब तरीके बताए हैं जो बिना डांटे बच्चे को अनुशासन सिखाते हैं।

मशहूर अभिनेत्री इशिता दत्ता इन दिनों अपनी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका यानी मदरहुड का आनंद ले रही हैं। उनका बेटा वायु अब ढाई साल का हो चुका है। इशिता बताती हैं कि इस उम्र में बच्चे अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की कोशिश करते हैं। वे हर काम चाहे खाना खाना हो, कपड़े पहनना हो या जूते पहनना खुद करना चाहते हैं। लेकिन जब वे सफल नहीं होते तो चिड़चिड़ापन और टॉडलर मेल्टडाउन (तेज गुस्सा और रोना) शुरू हो जाता है।

जब डांट और प्यार दोनों फेल हो जाएं

इशिता ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि उन्होंने हर तरीका अपनाया कभी सख्ती की, कभी चिल्लाईं और कभी बेटे के साथ खुद भी रो पड़ीं। उन्होंने सीखा कि मेल्टडाउन के वक्त न डांट काम आती है और न ही तुरंत समझाना। इशिता कहती हैं कि उस पल बच्चे को समाधान नहीं बल्कि भरोसे की जरूरत होती है। मैं बस उसके पास बैठ जाती हूं और कहती हूं कि मम्मा यहीं है। उसे शांत होने का पूरा समय देना ही सबसे बड़ा इलाज है।

ऑर्डर नहीं विकल्प देना

पैरेंटिंग को आसान बनाने के लिए इशिता ने एक बहुत ही कारगर टिप साझा की "बच्चों को ऑर्डर न दें, उन्हें विकल्प (Options) दें।"

इशिता के अनुसार जब आप बच्चे को सीधे निर्देश देते हैं तो वह विद्रोह करता है। इसके बजाय उन्हें चुनाव करने का मौका दें। उनसे यह पूछने के बजाय कि खाना खाओ यह पूछें कि मम्मा खिलाएं या आप खुद छोटे टुकड़ों में खाओगे? उनको अलमारी से दो कपड़े निकालकर पूछें कि आज कौन सा पहनना है?

इससे बच्चे को लगता है कि उसकी बात सुनी जा रही है और वह स्वतंत्र है जबकि असल में नियंत्रण माता-पिता के हाथ में ही रहता है।

परफेक्ट पेरेंट बनने का दबाव छोड़ें

इशिता का मानना है कि हर दिन खुद को परफेक्ट पेरेंट साबित करना जरूरी नहीं है। जरूरी है बच्चे के साथ धैर्य रखना और उसे यह महसूस कराना कि उसकी भावनाओं का सम्मान किया जा रहा है। इशिता की यह नो-ऑर्डर, ओनली ऑप्शन थ्योरी आज के आधुनिक दौर में बच्चों के मानसिक विकास के लिए बेहद प्रभावी साबित हो सकती है।

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