सीमा कुमारी
नई दिल्ली: रोशनी, उमंग का त्योहार ‘दीपावली’ (Diwali) इस वर्ष 24 अक्टूबर, सोमवार के दिन मनाया जाएगा। ज्योतिष- शास्त्र के अनुसार, रोशनी के त्योहार दीपावली पर मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर के दरवाजे पर अलग-अलग रंगों से रंगोली बनाई जाती है। वास्तु-शास्त्र में भी रंगोली बनाने का अपना महत्व है। घर के दरवाजे पर रंगोली बनाने से घर की नकारात्मकता दूर होती है। लेकिन, रंगोली बनाते समय रंगों और दिशा का ध्यान रखना चाहिए और भूलकर भी ये गलतियां नहीं करनी चाहिए। आइए जानें इस बारे में –
अगर आप बाजार से रेडीमेड रंगोली खरीदकर ला रहे हैं तो इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि इसमें भगवान गणेश, लक्ष्मी या किसी भी देवी-देवता की छवि नहीं होनी चाहिए। ऐसा होने पर आपको धन की हानि हो सकती है। अगर आप खुद रंगोली बना रहे हैं, तब भी देवी-देवता की कृति न बनाएं।
यदि आप अपने हाथ से रंगोली बना रहे हैं तो ध्यान रहे कि इन पर स्वास्तिक या फिर ओम का चिन्ह न बनाएं। वास्तु के अनुसार, रंगोली बनाने में रंगों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूर्व दिशा में पीले, लाल, हरे और गुलाबी रंग के इस्तेमाल से रंगोली बनाना बेहतर होगा। उत्तर दिशा में बैंगनी और नारंगी रंग का प्रयोग करें।
वास्तु के अनुसार, दक्षिण दिशा में लहरिया डिजाइन की रंगोली बिल्कुल भी न बनाएं। दक्षिण दिशा में आयताकार रंगोली बनाने से फायदा होता है। कहते हैं रंगोली उत्साह का प्रतीक और सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करती है। मां लक्ष्मी का वास वहीं होता है जहां घर में सुख-शांति और उत्सव का प्रवाह हो ।
शास्त्रों के अनुसार, रंगोली बनाने से घर में आकर्षण का केंद्र एक जगह पर बनता है। धनतेरस से लेकर दिवाली तक रोजाना स्नान के बाद सुबह घर के मुख्य द्वार पर मां लक्ष्मी के चरण चिन्हें बनाए। पद चिन्ह् घर में अंदर की ओर आते हुए होना चाहिए। इससे मां लक्ष्मी घर में विराजमान होती है।