क्या था ऑपरेशन सफेद सागर? 40 दिनों के हवाई ऑपरेशन से कैसे विजय हुआ कारगिल युद्ध
Kargil Vijay Diwas 2025: कारगिल युद्ध के समय ऑपरेशन सफेद सागर उर्फ Operation White Sea भारतीय वायुसेना द्वारा चलाया गया था जिसमें सेना के कई जवान शामिल हुए। यह ऑपरेशन विजय का हिस्सा था।
- Written By: दीपिका पाल
कारगिल विज्य दिवस आज (सौ. सोशल मीडिया)
Kargil Vijay Diwas 2025: आज देशभर में हर साल की तरह कारगिल विजय दिवस मनाया है। 26 जुलाई का दिन देशप्रेमियों के लिए बेहद खास है, जो कारगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए उन शूरवीरों के बलिदान को याद करता और नमन करता है। देश के शूरवीरों ने इस युद्ध को सफल बनाने के लिए अपने प्राणों की आहूति देते हुए भी घबराए नहीं। साल 2025 में कारगिल विजय दिवस की 26वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। दुश्मनों की हरकत का जवाब देने के लिए हमारे देश की तीनों सेनाएं तत्परता के काम करती है।
कारगिल युद्ध के समय ऑपरेशन सफेद सागर उर्फ Operation White Sea भारतीय वायुसेना द्वारा चलाया गया था जिसमें सेना के कई जवान शामिल हुए। जिस तरह पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर ने दुश्मनों को छकाया है उस तरह ही ऑपरेशन सफेद सागर रहा। चलिए जानते है ऑपरेशन सफेद सागर के बारे में।
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जानिए क्या था ऑपरेशन सफेद सागर?
यहां पर कारगिल युद्ध के दौरान सेना द्वारा ऑपरेशन सफेद सागर चलाया गया था। दरअसल यह ऑपरेशन उस दौरान चल रहे ऑपरेशन विजय का ही एक हिस्सा था। इस ऑपरेशन के तहत, इंडियन एयरफोर्स ने सीमा पर सुरक्षा की थी। इस ऑपरेशन का उद्देश्य पाकिस्तानी सेना द्वारा अनियंत्रित तरीके से जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में प्रवेश कर कब्जा करने से बचाना था। उस भारतीय वायुसेना आसानी से कूच नहीं कर पा रही थी। इसके लिए इंडियन एयरफोर्स को LOC पार करने की अनुमति नहीं दी गई थी। दरअसल यह अभियान आसमानी था यानि वायुसेना द्वारा चलाया जा रहा था। इस ऑपरेशन के लिए वायुसेना 25 मई को ही तैनात हो गई थी।
वायुसेना ने इस ऑपरेशन को ऑपरेशन विजय के साथ मिलकर सफल बनाया था। ऑपरेशन सफेद सागर ने सेना के जवानों को जमीन पर जंग लड़ने के लिए कवर फायर किया था। यानि जमीन पर भारतीय सेना और आसमान में वायुसेना तैनाती थी। बताया जाता है कि, कारगिल, द्रास और बटालिक सेक्टरों में 14,000 से 18,000 फीट की ऊंचाई पर मौजूद पाकिस्तानी घुसपैठियों की चौंकियों, बंकरों और ठिकानों को तबाह करना था।
दुश्मनों के ठिकानों को किया था ध्वस्त
बताया जाता है कि, ऑपरेशन सफेद सागर की सहायता से भारतीय सेना ने पाकिस्तान को बता दिया कि, भारत के बाजुओं में दम है और रहेगा। इस ऑपरेशन की मदद से भारतीय वायुसेना ने कारगिल, द्रास और बटालिक सेक्टरों में 14,000 से 18,000 फीट की ऊंचाई पर मौजूद पाकिस्तानी घुसपैठियों की चौंकियों, बंकरों और ठिकानों को तबाह किए। हवाई ऑपरेशन से इन अड्डों पर सटीक हवाई हमले किए गए थे।दुश्मन के कम्युनिकेशन नेटवर्क को कमजोर और ध्वस्त करना भी इस ऑपरेशन का प्रमुख काम था। बताते चलें कि, ऑपरेशन सफेद सागर का नेतृत्व उस वक्त के एयर चीफ मार्शल अनिल यशवंत टिपनीस ने किया था। उन्होंने रणनीतिक स्तर पर इस पूरे ऑपरेशन का मार्गदर्शन किया था। यशवंत टिपनीस ने इस दौरान प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्रालय और सेना प्रमुखों के बीच तालमेल बनाए रखा था। इसके अलावा इस मिशन के साथ एयर मार्शल पी.एस. अहलुवालिया ने वेस्टर्न कमांड की कमान संभाली हुई थी।
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जो ऑपरेशन के ऑपरेशन सफेद सागर की योजना और क्रियान्वयन करने में नियंत्रण का काम किया था। वहीं पर एयर वाइस मार्शल ए. के. तिवारी ने वायुसेना की लड़ाकू योजना और कोऑर्डिनेशन में भूमिका निभाई थी। ऑपरेशन सफेद सागर 40 दिनों तक चलने वाला हवाई ऑपरेशन था। इसमें लगभग 5000 से अधिक फ्लाइटों ने उड़ान भरी थी। वहीं, मिराज-2000 ने 1 टन से अधिक बम गिराए थे। इस ऑपरेशन में एक मिग-21 और एक मिग-27 विमान खोए थे और एक पायलट शहीद हुआ था।
जानिए किस एयरक्राफ्ट से हुए थे हमले
बताया जाता है कि, इस वायुसेना के मिशन में सेना के मिग एयरक्राफ्ट से हमले किए गए।
- MIG-2000- वायु सेना ने लेजर-गाइडेड बम LGBs का पहली बार इस्तेमाल किया था। जहां पर इस एयरक्राफ्ट के जरिए टाइगर हिल और अन्य दुश्मन ठिकानों को ध्वस्त किया गया था। साथ ही मिराज-2000 एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया गया था।
- MIG-27- इस एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल वायुसेना ने भारी बमबारी और दुश्मन के बंकर, तोपखाने और ट्रेंच सिस्टम को नष्ट करने के लिए किया गया था। यह रूस में बनाया गया एयरक्राफ्ट है। इसे वायु सेना में साल 1980 में शामिल किया गया था। इस एयरक्राफ्ट के जरिए ही इस जंगी जहाज की मदद से द्रास और बटालिक क्षेत्रों में हमले किए गए थे।
- MIG-21 की मदद से वायुसेना ने इस तेज गति वाले जेट का काम घायल सैनिकों को बाहर निकालने और शहीदों के लिए किया गया था। मिग-21 की मदद से छोटे बम धमाके, फ्लाइट कवर और निगरानी का काम भी किया गया था।
- जगुआर एयरक्राफ्ट का टोही और जमीनी हमलों के लिए उपयोग किया गया था। यह रात में हमला होने पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए तैयार होने वाला प्लेन था। इसकी मदद से दुश्मनों के कम्युनिकेशन और सप्लाई लाइन को ध्वस्त करना था।
