

World Lung Day 2026: जब फेफड़ों की सेहत की बात आती है, अक्सर हम सोचते हैं कि फेफड़ों के लिए सबसे बड़ा खतरा सिर्फ बाहर का वायु प्रदूषण या धूम्रपान है, लेकिन रोजाना की ऐसी कई आदतें है, जो हमारे लंग हेल्थ को खराब कर रही है।
घर के अंदर की हवा भी हमारी सांस की सेहत को प्रभावित करती है। जैसे- खाना पकाने के दौरान निकलने वाला धुआं, अगरबत्ती और धूप का धुआं, सफाई में इस्तेमाल होने वाले केमिकल, धूल-मिट्टी और घर में सही वेंटिलेशन न होना धर के भीतर की हवा की क्वालिटी को खराब करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, खराब हवा सांस की सेहत को प्रभावित कर सकती है और फेफड़ों की कार्यक्षमता पर भी असर डाल सकती है।
हर भारतीय घर में रोजाना पूजा-पाठ के दौरान अगरबत्ती और धूप जलाना आम बात है। बता दें कि किसी भी चीज को जलाने से निकलने वाला धुआं हवा में छोटे कण और दूसरे प्रदूषक छोड़ता है। WHO भी अगरबत्ती के धुएं को घर के अंदर के वायु प्रदूषण का कारण मानता है।
अगर घर का कमरा छोटा हो और खिड़की-दरवाजे बंद हों, तो धुआं लंबे समय तक हवा में रहता है। इसलिए अगरबत्ती या धूप जलाते समय कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखना चाहिए।
किचन का धुआं भी इनडोर एयर पॉल्यूशन का एक कारण है। गैस पर खाना पकाने के दौरान उठने वाले धुएं से कुछ प्रदूषक भी निकलते हैं, खासकर जब वेंटिलेशन सही से न हो। इसलिए खाना बनाते समय एग्जॉस्ट फैन या चिमनी का इस्तेमाल करें और फ्रेश एयर के लिए उचित वेंटिलेशन रखें।
फर्श, बाथरूम और किचन की सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले घरों में मौजूद प्रोडक्ट में भी केमिकल होते हैं। क्लीनिंग प्रोडक्ट्स, डिसइन्फेक्टेंट, एयर फ्रेशनर और कुछ स्प्रे इनडोर हवा को भी पॉल्यूट करते हैं। EPA के अनुसार, कुछ घरेलू उत्पादों से निकलने वाले केमिकल आंख, नाक और गले में जलन और सांस की समस्या पैदा करते हैं।
सफाई करते समय खिड़की खोल कर रखें और लेबल पर लिखे डायरेक्शन के अनुसार ही उत्पाद का इस्तेमाल करें। दूसरी ओर, अलग-अलग क्लीनिंग प्रोडक्ट्स को आपस में कभी न मिलाएं, क्योंकि इससे जहरीली गैस बन सकती हैं।
फर्नीचर, कारपेट, पर्दे, गद्दे और दूसरे कपड़ों पर जमे धूल में छोटे कण और एलर्जेन हो सकते हैं। इन्हें साफ करते समय ये कण हवा में फैलते हैं। नियमित रूप से धूल साफ करने, फर्नीचर को वैक्यूम करने और फर्श को गीले कपड़े से साफ करना चाहिए।
सिर्फ घर को साफ रखना ही काफी नहीं है, बल्कि अंदर की हवा का बाहर निकलना और ताजी हवा का भीतर आना भी जरूरी है। बंद कमरे में खाना पकाने, सफाई करने या धुआं पैदा करने वाली चीजों के इस्तेमाल से पॉल्यूटेंट जमा होते हैं। इनडोर एयर क्वालिटी सुधारने के लिए पर्याप्त वेंटिलेशन रखना और जरूरत के अनुसार फिल्ट्रेशन या एयर क्लीनिंग का इस्तेमाल करना भी समय-समय पर जरूरी है।
सिगरेट या दूसरे तंबाकू उत्पाद का इस्तेमाल बंद कमरे या घर पर करना फेफड़े के लिए बेहद हानिकारक है। सिर्फ धूम्रपान का असर केवल उस व्यक्ति पर ही नहीं पड़ता, बल्कि आसपास मौजूद लोग भी सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में आते हैं और उनके भी लंग पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है।
घर की हवा को बेहतर रखने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जानी चाहिए। घर में धुआं पैदा करने वाली चीजों का इस्तेमाल कम करें। नमी या पानी के रिसाव को भी नजरअंदाज न करें, क्योंकि इससे मोल्ड बढ़ सकता है और इनडोर एयर क्वालिटी प्रभावित होती है।
अगर किसी व्यक्ति को लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न और सीटी जैसी आवाज के साथ सांस लेने में प्रॉब्लम हो रही है, तो इसे सिर्फ घर की हवा का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।