

World Dream Day 2026: सपने देखना आसान है, लेकिन उन्हें हकीकत में बदलने के लिए एक दूरदर्शी सोच, मेहनत और लगातार कोशिश की जरूरत होती है। भारत में ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने अपने समय से आगे का सपना देखा और फिर उस सपने को पूरा करने के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया।
किसी ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सपना देखा, किसी ने किसानों की जिंदगी बदलने का, तो किसी ने अंतरिक्ष तक पहुंचने का सपना पूरा किया। वर्ल्ड ड्रीम डे पर जानिए ऐसे ही 5 भारतीयों की कहानी, जिनके सपने और काम आज भी लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का सपना सिर्फ एक बड़ा साइंटिस्ट बनने तक सीमित नहीं था, उन्होंने भारत को तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और विकसित देश बनाने का भी विजन रखा। उन्होंने भारत के स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में देश की टेक्नोलॉजी विजन 2020 तैयार करने में भी योगदान दिया।
राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक, कलाम ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा युवाओं के बीच बिताया और उन्हें देश के विकास से जोड़ने की कोशिश की। उनकी किताबें और उनके विचार आज भी युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं।
आज भारत दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देशों में है, लेकिन इसके पीछे एक लंबी कहानी है। डॉ. वर्गीज कुरियन को भारत की श्वेत क्रांति का शिल्पकार कहा जाता है। उन्होंने ऑपरेशन फ्लड के जरिए डेयरी सहकारी मॉडल को देशभर में विस्तार देने का काम किया।
नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के अनुसार, ऑपरेशन फ्लड ने भारत के डेयरी सेक्टर को बड़े स्तर पर बदलने में मदद की और ग्रामीण परिवारों, खासकर छोटे दूध उत्पादकों के लिए आर्थिक दृष्टिकोण से अवसर बढ़ाए। कुरियन का काम सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने ऐसी संस्थाएं और सिस्टम बनाने पर जोर दिया, जिनमें किसान खुद विकास का हिस्सा बन सकें।
हरियाणा के करनाल से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुंचने वाली कल्पना चावला की कहानी आज भी क्लासरूम की फेवरेट है, जिससे छोट-छोटे बच्चे भी प्रेरणा लेते है और खुद के लिए गोल सेट करते हैं। उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और आगे अमेरिका में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में उच्च शिक्षा हासिल की। बाद में वह नासा की अंतरिक्ष यात्री बनीं और 1997 में पहली बार स्पेस शटल कोलंबिया से अंतरिक्ष गईं।
2003 में कोलंबिया दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन अंतरिक्ष और एयरोस्पेस के क्षेत्र में उनकी यात्रा आज भी युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करती है।
सपने की बात हो और धीरूभाई अंबानी की कहानी का जिक्र न हो, तो भारत की कहानी अधूरी सी लगती है। अंबानी की कहानी एक बड़े विजन की कहानी है। 1957 में भारत लौटने के बाद उन्होंने मुंबई में यार्न ट्रेडिंग का कारोबार शुरू किया और उसे भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक बनाने का सपना देखा।
आगे चलकर उन्होंने कारोबार को बड़े स्तर पर विस्तार दिया। 1977 में रिलायंस टेक्सटाइल्स का आईपीओ आया, जिसे कंपनी की हिस्ट्री का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। धीरूभाई ने आम भारतीय निवेशकों को भी कंपनी की ग्रोथ से जोड़ने की कोशिश की और उनके कारोबारी विजन ने भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर पर गहरा असर डाला। आज रिलायंस का नाम घर-घर तक पहुंच चुका है।
श्रीधर वेम्बू की कहानी थोड़ी अलग है। टेक्नोलॉजी कंपनी जोहो के को-फाउंडर के तौर पर उन्होंने सिर्फ एक ग्लोबल सॉफ्टवेयर बिजनेस बनाने पर ध्यान नहीं दिया। इसके साथ उन्होंने छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में टेक्नोलॉजी से जुड़े रोजगार और अवसर पैदा करने का मॉडल भी आगे बढ़ाया।
जोहो के मुताबिक, कंपनी ने ग्रामीण प्रतिभाओं को मौका देने और छोटे शहरों में ऑफिस स्थापित करने की दिशा में भी काम किया। इसका मकसद यह था कि लोगों को हर अवसर के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन न करना पड़े।