बचपन में कम चीनी खाने से क्या कम हो जाता है डायबिटीज का खतरा? रिसर्च में हुआ खुलासा

डायबिटीज आधुनिक दुनिया में तेजी से फैलने वाली बीमारी है, जो न केवल बुजुर्गों, बल्कि बच्चों को भी प्रभावित कर रही है। जीवनशैली में बदलाव, खराब खान-पान और व्यायाम की कमी के कारण कई लोग डायबिटीज के शिकार हो जाते हैं।
बचपन में कम चीनी खाने से क्या बढ़ती उम्र में नहीं होगी डायबिटीज? जानें क्या कहती है रिसर्च
डायबिटीज आधुनिक दुनिया में तेजी से फैलने वाली बीमारी Image- Social Media
Published on
Updated on

नई दिल्ली : डायबिटीज आधुनिक दुनिया में तेजी से फैलने वाली बीमारी है, जो न केवल बुजुर्गों, बल्कि बच्चों को भी प्रभावित कर रही है। जीवनशैली में बदलाव, खराब खान-पान और व्यायाम की कमी के कारण कई लोग डायबिटीज के शिकार हो जाते हैं। भारत में डायबिटीज रोगियों की संख्या 10 मिलियन से अधिक है। हर साल इस बीमारी के मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।

माना जाता है कि बहुत अधिक मिठाइयां खाने से भी डायबिटीज हो सकता है। मिठाइयां सीधे तौर पर डायबिटीज से जुड़ी तो नहीं हैं, लेकिन मिठाइयां मोटापे में योगदान करती हैं, जो डायबिटीज के लिए एक जोखिम कारक है। बता दें कि डायबिटीज रिसर्च में पाया गया है कि जिसमें बताया गया है कि बचपन में कम मीठा खाने से बढ़ती उम्र में डायबिटीज का रिस्क कम हो जाता है।

मिठाइयां खाने से डायबिटीज का कोई सम्बध नहीं

इससे पहले कि हम इस रिसर्च को जाने आइए डायबिटीज पहले समझें कि क्यों होता है। हमारे शरीर में इंसुलिन हार्मोन होता है, जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। जब शरीर हार्मोन इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है या ठीक से काम नहीं करता है, तो रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है और डायबिटीज विकसित होता है।

डायबिटीज दो प्रकार का होता है। पहला, टाइप 1 डायबिटीज, एक ऑटोइम्यून बीमारी। इस मामले में प्रतिरक्षा प्रणाली इंसुलिन का उत्पादन करने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देती है, और अगला टाइप 2 डायबिटीज है। यह समस्या मोटापा, खराब आहार और जीवनशैली के कारण होती है। भारत में टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

डायबिटीज
Image- Social Media

इंसुलिन के प्रभाव कारण डायबिटीज की समस्या

नेचुरल जर्नल में प्रकाशित रिसर्च से पता चलता है कि बचपन के दौरान चीनी का सेवन कम करने से जीवन में बाद में डायबिटीज होने का खतरा कम हो सकता है। ऐसे में इस अध्ययन का सीधा संबंध हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन से है। जब बचपन में चीनी का सेवन कम कर दिया जाता है और बच्चों को पोषक तत्वों से भरपूर भोजन मिलता है, तो शरीर पर बोझ नहीं पड़ता है और शरीर में ग्लूकोज और इंसुलिन का स्तर नियंत्रण में रहता है।

बचपन से अधिक चीनी का सेवन आपके शरीर को अधिक हार्मोन इंसुलिन का उत्पादन करने के लिए मजबूर करता है। ऐसे में इंसुलिन का प्रभाव कम हो जाता है और डायबिटीज की समस्या हो सकती है। रिसर्च से पता चला है कि बचपन में कैंडी का सेवन कम करने से डायबिटीज होने का खतरा भी कम हो सकता है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com