

Women Feel Colder Than Men: अक्सर आपने देखा होगा कि एक ही कमरे में बैठे लोगों में किसी को गर्मी लग रही होती है, जबकि किसी दूसरे को ठंड। खासकर महिलाओं और पुरुषों के बीच तापमान को लेकर यह अंतर काफी आम माना जाता है। इसके पीछे केवल पसंद-नापसंद नहीं, बल्कि शरीर की बनावट और तापमान नियंत्रित करने की प्रक्रिया भी जिम्मेदार होती है।
औसतन महिलाओं में शरीर का आकार छोटा और आराम की अवस्था में मेटाबॉलिक रेट पुरुषों की तुलना में कम होती है। मेटाबॉलिज्म शरीर में ऊर्जा इस्तेमाल करने की प्रक्रिया है और इसी दौरान गर्मी भी पैदा होती है। इसलिए कम गर्मी पैदा होने पर कुछ महिलाओं को समान तापमान में ज्यादा ठंड महसूस होती है।
जब वातावरण ठंडा होता है, तो शरीर अपने महत्वपूर्ण अंदरूनी अंगों का तापमान बनाए रखने की कोशिश करता है। इसके लिए हाथ-पैर और त्वचा की ओर जाने वाली खून की नलिकाएं सिकुड़ सकती हैं, जिससे इन हिस्सों में रक्त प्रवाह कम हो जाता है। नतीजतन हाथ-पैर ज्यादा ठंडे महसूस हो सकते हैं।
महिलाओं में एस्ट्रोजन का स्तर मासिक चक्र, गर्भावस्था और मेनोपॉज जैसे जीवन के अलग-अलग चरणों में बदलता रहता है। ये बदलाव शरीर के तापमान को नियंत्रित करने वाली प्रक्रिया और खून की नलिकाओं के फैलने-सिकुड़ने को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि कुछ महिलाओं में अलग-अलग समय पर गर्मी या ठंड महसूस करने में बदलाव हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति को हमेशा या पहले की तुलना में अचानक बहुत ज्यादा ठंड लगने लगी है, तो इसके पीछे केवल मौसम या शरीर की सामान्य संवेदनशीलता नहीं हो सकती। थायरॉयड की समस्या, एनीमिया, आयरन या विटामिन बी12 की कमी, कम वजन, खराब रक्त संचार, डायबिटीज, तंत्रिका संबंधी समस्या, नींद की कमी या शरीर में पानी की कमी भी ठंड के प्रति संवेदनशीलता बढ़ा सकती है।
इसलिए अगर ठंड लगने के साथ लगातार थकान, कमजोरी, हाथ-पैर सुन्न होना, त्वचा का रंग बदलना या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।