

Causes Of Mouth Ulcers : मुंह में छाले होना एक आम समस्या है, जिनकी वजह से न तो आप खा पाते हैं और न ही कुछ पी पाते हैं। मुंह में कुछ ही डालते ही जलन और तेज दर्द होता है। यह आमतौर पर जीभ, मसूड़ों, होंठ, मुंह के अंदर या फिर गले में हो जाते हैं। इनका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह बड़े हो जाते हैं या एक से ज्यादा हो सकते हैं।
आपको बता दें, यह समस्या किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकती है। ज्यादातर मामलों में ये छाले कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन अगर ये बार-बार हो रहे हैं या लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहे हैं, तो इन्हें अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है।
ये छाले शरीर में मौजूद कुछ गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकते हैं। आइए, जानते हैं कि मुंह में बार-बार छाले होने के पीछे कौन-कौन सी समस्याएं हो सकती हैं।
पाचन से जुड़ी समस्याएं
मुंह में छाले होने का एक और कारण डाइजेशन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। पेट में गैस, एसिडिटी, कब्ज या अपच जैसी समस्याएं शरीर में टॉक्सिन्स के स्तर को बढ़ा सकती हैं, जिससे मुंह में छाले होने की संभावना बढ़ जाती है।
अगर आपको पाचन संबंधी समस्याएं हैं और साथ ही मुंह में बार-बार छाले हो रहे हैं, तो यह शरीर के अंदरूनी संतुलन में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। ऐसे में, पाचन तंत्र को दुरुस्त करने और पित्त दोष को संतुलित करने के लिए डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करना जरूरी है।
इम्यून सिस्टम की कमजोरी
मुंह में छाले होने का एक और बड़ा कारण इम्यून सिस्टम की कमजोरी भी हो सकता है। जब शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, तो शरीर इन्फेक्शन और बीमारियों से लड़ने में असमर्थ हो जाता है। इस कारण मुंह में बैक्टीरिया या वायरस के संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है, जिससे छाले हो सकते हैं।
तनाव और चिंता
तनाव और चिंता भी मुंह में छाले होने का एक बड़ा कारण हो सकता है। जब हम स्ट्रेस में होते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। इसके अलावा, तनाव के कारण शरीर में सूजन बढ़ सकती है, जिससे मुंह में छाले होने की संभावना बढ़ जाती है।
पोषक तत्वों की कमी
मुंह में बार-बार छाले होने का एक प्रमुख कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकता है। विटामिन-बी12, आयरन, जिंक और फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्वों की कमी से मुंह में छाले होने की संभावना बढ़ जाती है। ये पोषक तत्व शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने और श्लेष्मा झिल्ली को हेल्दी रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।