कहीं सोशल मीडिया की ये लत आपके मेंटल हेल्थ की दुश्मन तो नहीं? जानें Gen Z का नया ट्रेंड जो बदलेगा आपका मूड!

Doom Scrolling Trend: आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। हालांकि इसका अधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
doomscrolling vs bloomscrolling
मोबाइल पर सोशल मीडिया इस्तेमाल करता युवा (सौ. फ्रीपिक)
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Doomscrolling vs Bloomscrolling: आजकल स्मार्टफोन हाथ में आते ही हम रील और खबरों को स्क्रॉल करना शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नकारात्मक खबरें देखते रहना एक गंभीर मानसिक बीमारी का कारण बन सकता है। इसे डूमस्क्रॉलिंग कहते हैं। हालांकि अब सोशल मीडिया पर ब्लूमस्क्रॉलिंग का नया ट्रेंड आ गया है जो मानसिक शांति का रास्ता दिखा रहा है।

सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है लेकिन इसके इस्तेमाल का तरीका हमारी मानसिक सेहत तय करता है। आजकल डूमस्क्रॉलिंग शब्द काफी चर्चा में है। यह एक ऐसी आदत है जिसमें व्यक्ति घंटों तक युद्ध, महामारी, अपराध या दुखद खबरें पढ़ता रहता है। जानकारी के अनुसार यह आदत धीरे-धीरे इंसान को एंग्जायटी, स्ट्रेस और नींद न आने जैसी समस्याओं का शिकार बना रही है।

क्या है डूमस्क्रॉलिंग

डूम (Doom) का अर्थ है कयामत या विनाश। जब हम जानबूझकर या अनजाने में सोशल मीडिया पर केवल नकारात्मक खबरें ही स्क्रॉल करते रहते हैं तो हमारा मस्तिष्क फाइट ऑर फ्लाइट मोड में चला जाता है। इससे शरीर में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है। खासकर जेन-जी (Gen-Z) और युवाओं में यह समस्या अधिक देखी जा रही है क्योंकि वे दिन का एक बड़ा हिस्सा स्क्रीन पर बिताते हैं। लगातार नकारात्मक कंटेंट देखने से व्यक्ति को दुनिया असुरक्षित लगने लगती है जिसे मीन वर्ल्ड सिंड्रोम भी कहा जाता है।

Social Media Addiction Impact On Mental Health
मोबाइल पर सोशल मीडिया इस्तेमाल करता युवा (सौ. फ्रीपिक)

ब्लूमस्क्रॉलिंग

डूमस्क्रॉलिंग के विपरीत अब ब्लूमस्क्रॉलिंग का ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। ब्लूम का अर्थ है खिलना। ब्लूमस्क्रॉलिंग वह अभ्यास है जिसमें आप जानबूझकर अपनी फीड में सकारात्मक, प्रेरणादायक और सुकून देने वाला कंटेंट देखते हैं। इसमें प्रकृति की तस्वीरें, प्यारे जानवरों के वीडियो, मोटिवेशनल कोट्स या गार्डनिंग जैसे वीडियो शामिल होते हैं। यह आदत मस्तिष्क में डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे हैप्पी हार्मोन्स को रिलीज करने में मदद करती है जिससे मूड तुरंत फ्रेश हो जाता है।

डिजिटल ट्रैप से कैसे बचें

अगर आप अपनी डिजिटल डाइट को कंट्रोल करके अपनी मेंटल हेल्थ को सुधार सकते हैं। इसके लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं।

टाइम लिमिट सेट करें

अपने फोन में ऐप टाइमर लगाएं ताकि आप एक तय समय से ज्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल न करें।

नेगेटिव अकाउंट्स को अनफॉलो करें

जो पेज या अकाउंट्स केवल सनसनीखेज और नकारात्मक खबरें फैलाते हैं उन्हें तुरंत अपनी फीड से हटा दें।

नो-फोन जोन

सोने से कम से कम एक घंटा पहले फोन का इस्तेमाल बंद कर दें। रात के अंधेरे में डूमस्क्रॉलिंग करना नींद की गुणवत्ता को सबसे ज्यादा खराब करता है।

ब्लूमिंग फीड बनाएं

जानबूझकर ऐसे अकाउंट्स को फॉलो करें जो आपको कुछ नया सिखाते हों या खुशी देते हों।

तकनीक बुरी नहीं है लेकिन उसका इस्तेमाल करने का हमारा नजरिया हमारी सेहत तय करता है। अगली बार जब आप स्क्रॉल करें तो खुद से पूछें क्या यह खबर आपको डूम (तनाव) दे रही है या ब्लूम (सुकून)।

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