Pregnancy After 40: 40 के बाद प्रेग्नेंसी प्लान कर रहे हैं? जानें रिस्क फैक्टर और जरूरी सावधानियां

Pregnancy Risks After 40: 40 साल की उम्र के बाद प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं, तो फर्टिलिटी, जेस्टेशनल डायबिटीज, हाई बीपी से जुड़े रिस्क के बारे में आपको पता होना चाहिए। जानें जरूरी सावधानियां।
Pregnancy after 40 risk factors precautions
प्रेग्नेंसीफोटो.सोशल मीडिया
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High Risk Pregnancy: पाकिस्तानी एक्ट्रेस माहिरा खान 41 साल की उम्र में दूसरी बार मां बनने वाली हैं। उन्होंने हाल ही में बताया कि उन्होंने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी प्लान नहीं की थी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि 24 साल की उम्र में मां बनना और अब 41 साल की उम्र में मां बनने के अनुभव अलग-अलग हैं। उन्होंने इसे फिजिकली चैलेंजिंग बताया।

माहिरा का अनुभव भले ही पर्सनल हो, लेकिन 40 के बाद की उम्र में प्रेग्नेंसी को लेकर महिलाओं के मन में कई तरह के सवाल उठते हैं। उम्र के साथ प्रेग्नेंसी में क्या बदलाव आते हैं और किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

40 के बाद प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ता है रिस्क?

महिलाओं की फर्टिलिटी की एक उम्र होती है, जो बढ़ती उम्र के साथ कम होने लगती है। अंडों की संख्या और क्वालिटी कम होने लगती है और इसी वजह से प्रेग्नेंसी होने में समय अधिक लगता है। American Society for Reproductive Medicine के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ प्रेग्नेंसी की संभावना घटती है और मिसकैरेज और बच्चे में एब्नॉर्मिलिटी के रिस्क बढ़ जाते हैं।

क्या होता है मिसकैरेज और एब्नॉर्मिलिटी रिस्क

40 के बाद बच्चा नहीं ठहरना एक समस्या है और इसका कारण है इंब्रायो में क्रोमोजोमल एब्नॉर्मिलिटी का बढ़ना। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि 40 की उम्र के बाद हेल्दी बेबी नहीं हो सकते हैं।

प्रेग्नेंसी रिस्क फैक्टर

उम्र 35 वर्ष या उससे अधिक होने पर प्रेग्नेंसी को एडवर्स मैटरनल, फीटल और नियोनैटल के लिए रिस्की माना जाता है। साथ ही 40 की उम्र के बाद हाई ब्लड प्रेशर, प्रीक्लेमसिया, जेस्टेशनल डायबिटीज, मिसकैरेज और स्टिलबर्थ जैसी समस्याएं बढ़ जाती है। कुछ प्रेग्नेंसी में बेबी का बहुत छोट या बड़ा होना भी एक समस्या हो जाती है।

प्रेग्नेंसी प्लानिंग कब करें?

अगर 40 के बाद प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं, तो डॉक्टर से कंसल्टेशन लेना बेहद जरूरी है। इस दौरान आपकी मेडिकल हिस्ट्री, पहली प्रेग्नेंसी, मेडिसिन, वैक्सिनेशन और कोई हेल्थ प्रॉब्लम की समीक्षा की जानी चाहिए। अगर पीरियड्स की समस्या है, तो इसे भी इवैल्यूएट किया जाना चाहिए।   

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प्रेग्नेंसी की प्लानिंग कर रही महिलाओं को फॉलिक एसिड के बारे में भी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। महिलाओं को फॉलिक एसिड रिच फूड या गोलियां जरूर लेनी चाहिए। NHS के अनुसार, सामान्य तौर पर प्रेग्नेंसी के पहले 12 हफ्तों तक रोजाना 400 mg फॉलिक एसिड लेने की सलाह दी जाती है। बता दें कि इसकी डोज डॉक्टर द्वारा तय की जाती है।

प्रेग्नेंस होने के बाद इन टेस्ट को जरूर कराएं

40+ प्रेग्नेंसी में नियमित रूप से प्रेग्नेंसी की मॉनिटरिंग जरूरी हो जाती है। जरूरत के अनुसार बीपी, ब्लड शुगर और फीटर ग्रोथ की जांच की जाती है। 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र में प्रेग्नेंसी के थर्ड ट्राइमेस्टर में फीटल ग्रोथ एसेसमेंट और एंटीनेटल फीटल सर्विलांस पर विचार करने की सलाह डॉक्टर द्वारा दी जाती है। जेनेटिक स्क्रीनिंग भी लेट प्रेग्नेंसी में जरूरी होती है।

40 के बाद प्रेग्नेंसी का मतलब सिर्फ रिस्क नहीं

40 के बाद प्रेग्नेंसी हाई रिस्क हो, ऐसा जरूरी नहीं। हर महिला की हेल्थ, फर्टिलिटी, पहली प्रेग्नेंसी और मेडिकल हिस्ट्री अलग होती है और इसी आधार पर दूसरी प्रेग्नेंसी महत्वपूर्ण होती है।

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