One Health Day 2026: इंसानों में फैलने वाली 10 में से 6 बीमारियां जानवरों से आती हैं, जानिए क्या है कनेक्शन

One Health Meaning: वन हेल्थ डे पर जानिए इंसानों, जानवरों और पर्यावरण की सेहत का आपस में क्या संबंध है। रेबीज से लेकर लेप्टोस्पायरोसिस तक, जानिए इनसे बचाव के आसान तरीके।
one health day 6 out of 10 infectious diseases from animals in human.
वन हेल्थ डेफोटो.सोशल मीडिया
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Highlights:

  • इंसानों में होने वाली 10 में से 6 संक्रामक बीमारियां जानवरों से फैलती हैं।

  • रेबीज, ब्रुसेलोसिस और लेप्टोस्पायरोसिस भारत में महत्वपूर्ण जूनोटिक बीमारियां हैं।

  • पशुओं का टीकाकरण, साफ-सफाई और सुरक्षित खानपान से संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है।

Animal to Human Diseases: आपके घर में रहने वाले पालतू जानवर, आसपास घूमने वाले आवारा पशु, खेतों में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक और पर्यावरण की सेहत, ये सारी चीजें इंसानों में होने वाली बीमारियों से जुड़ी हुई है। दरअसल, इंसानों, जानवरों और पर्यावरण की सेहत एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।

मनुष्य, जानवर औऱ पर्यावरण के इस संबंध को समझाने के लिए हर साल 3 नवंबर को वन हेल्थ डे मनाया जाता है। CDC के आंकड़े बताते हैं कि इंसानों में होने वाली 10 में से लगभग 6 ज्ञात संक्रामक बीमारियां जानवरों से फैलती हैं। इसलिए हमारी सेहत की सुरक्षा के लिए सिर्फ इंसानों का इलाज ही नहीं, बल्कि जानवरों और पर्यावरण की सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है।

क्या है वन हेल्थ और क्यों मनाया जाता है यह दिन?

वन हेल्थ का मतलब है इंसान, जानवर और पर्यावरण की सेहत को अलग-अलग न देखकर एक साथ मानना। उदाहरण के लिए, अगर किसी इलाके में जानवरों के बीच कोई संक्रामक बीमारी फैलती है, तो उसके इंसानों तक पहुंचने का खतरा भी होता है। इसी तरह दूषित पानी, खराब स्वच्छता और पर्यावरण में होने वाले बदलाव भी इंसानों और जानवरों दोनों की सेहत को प्रभावित करते हैं।

इस सोच के तहत डॉक्टर, वेटनरी डॉक्टर, पर्यावरण विशेषज्ञ और स्वास्थ्य विभाग मिलकर बीमारियों की रोकथाम और निगरानी पर काम करते हैं। इसका उद्देश्य केवल बीमारी फैलने के बाद इलाज करना ही नहीं, बल्कि उसके संभावित खतरे को पहचानना भी है।

जानवरों से इंसानों में कैसे फैलती हैं बीमारियां?

जानवरों और इंसानों के बीच संक्रमण फैलने के कई रास्ते हैं। इसे मेडिकल भाषा में जूनोटिक डिजीज कहा जाता है। ये बीमारियां वायरस, बैक्टीरिया, फंगस और पैरासाइट्स की वजह से हो सकती हैं।

इन तरीकों से जानवरों से इंसानों में फैलती है बीमारी

  • जानवर को छूने से: संक्रमित जानवर की लार, खून, पेशाब या मल के संपर्क में आने से कुछ संक्रमण फैलते हैं।

  • काटने या खरोंचने से: कुत्ते, बिल्ली या दूसरे संक्रमित जानवर के काटने से रेबीज जैसे संक्रमण का खतरा हो बढ़ता है।

  • दूषित भोजन से: संक्रमित पशुओं के कच्चे दूध, अधपके मांस या दूषित खाद्य पदार्थों से कुछ बैक्टीरियल संक्रमण फैलते हैं।

  • कीड़े-मच्छरों के जरिए: कुछ मच्छर और टिक संक्रमण फैलाने वाले वाहक होते हैं। इनके काटने से इंसानों में बीमारी पहुंचती है।

  • दूषित पानी और मिट्टी से: संक्रमित जानवरों के पेशाब या मल से दूषित पानी और मिट्टी के संपर्क में आने से लेप्टोस्पायरोसिस जैसे संक्रमण फैलते हैं।

जानवरों से होने वाली बीमारी

रेबीज

इंफेक्टेड स्तनधारी जानवर के काटने या खरोंचने से वायरस फैलता है। कुत्ते इसके संक्रमण का प्रमुख स्रोत हैं। काटने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से 15 मिनट तक धोकर बिना देरी किए मेडिकल सहायता लें।

लेप्टोस्पायरोसिस

यह बैक्टीरियल संक्रमण संक्रमित जानवरों के पेशाब से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैलता है। बारिश और बाढ़ के दौरान इसका खतरा बढ़ जाता है।

ब्रुसेलोसिस

यह इंफेक्शन संक्रमित पशुओं से इंसानों में फैलता है। बिना उबला या नॉन-पेस्चिराइज्ड संक्रमित दूध और डेयरी उत्पाद इसका एक संभावित सोर्स हो सकता है।

एवियन इन्फ्लुएंजा

यह इन्फ्लुएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है, जो मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है। संक्रमित पक्षियों या दूषित वातावरण के संपर्क से इंसानों में भी संक्रमण होता है।

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पर्यावरण से जुड़े कारण भी होते हैं जिम्मेदार

  • जंगल कम होने और इंसानी बस्तियों के वन्यजीवों के करीब पहुंचने से इंसानों और जंगली जानवरों के बीच संपर्क बढ़ता है।

  • तापमान और बारिश के पैटर्न में बदलाव से मच्छरों और टिक जैसे संक्रमण फैलाने वाले जीवों का दायरा बढ़ता है।

  • दूषित पानी इंसानों और जानवरों दोनों में बीमारियां पैदा करता है।