आयुष्मान भारत योजना: गरीबों के लिए बड़ा सहारा, लेकिन सिस्टम की खामियां अब भी चुनौतीपूर्ण

Ayushman Bharat Scheme: आयुष्मान भारत योजना गरीबों के लिए वरदान है, लेकिन सरकार के लिए यह कहानी केवल उपलब्धियों की नहीं, बल्कि उसके सामने मौजूद चुनौतियों की भी है। पूरी खबर पढ़ें।
आयुष्मान भारत योजना
पीएम मोदीसोर्स ( AI Generated)
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Ayushman Bharat PM-JAY: 23 सितंबर 2023 को झारखंड के रांची से शुरु हुई स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत योजना को आज 8 साल पूरे हो गए है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह योजना संजीवनी की तरह काम कर रही है। योजना से स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखा गया है। आयुष्मान भारत योजना के दो मुख्य भाग (घटक) हैं-

  1. आयुष्मान आरोग्य मंदिर

  2. प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY)

आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के कारण पिछले कुछ सालों में इस योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को हॉस्पिटल में एडमिट होने पर हर साल 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा मुहैया कराया जाता है।

योजना के मुख्य आंकड़े

  • कुल कवर किए गए लोग: 60 करोड़ से अधिक नागरिक

  • जारी आयुष्मान कार्ड: 48.54 करोड़ से अधिक

  • अस्पताल में भर्ती: 13.25 करोड़ से अधिक

इस समय इस योजना के अंतर्गत 37,413 सरकारी और निजी अस्पताल शामिल हैं। हालांकि, योजना का दायरा बढ़ने और बड़ी संख्या में लोगों को इलाज की सुविधा मिलने के साथ-साथ इसके क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल भी सामने आए हैं।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की ऑडिट रिपोर्ट में अस्पतालों की निगरानी, फर्जी या संदिग्ध कार्ड, दावों की जांच और अस्पतालों पर कार्रवाई में देरी जैसी कमियों का उल्लेख किया गया था। इसलिए आयुष्मान भारत की कहानी केवल उपलब्धियों की नहीं, बल्कि उसके सामने मौजूद चुनौतियों की भी है।

कैसे काम करती है आयुष्मान भारत योजना?

PM-JAY के तहत पात्र परिवार को सालाना 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा मिलता है। इस योजना की खासियत यह है कि लाभार्थी को सरकार के द्वारा सूचीबद्ध अस्पताल में इलाज के दौरान कैशलेस सुविधा मिल सकती है। सरकार के अनुसार योजना अब देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है।

साथ ही दूसरे राज्यों में इलाज कराने की सुविधा यानी इंटर-स्टेट पोर्टेबिलिटी भी उपलब्ध है। जुलाई 2026 तक अलग-अलग राज्यों के बीच 29.05 लाख से अधिक अस्पताल दाखिले करीब 8,383.97 करोड़ रुपये की अधिकृत राशि के साथ दर्ज किए गए थे।

वृद्धजनों के लिए योजना की सौगात

आयुष्मान भारत का दायरा पिछले कुछ वर्षों में बढ़ाया गया है। सरकार के द्वारा अक्टूबर 2024 में 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना योजना के दायरे में शामिल करने का फैसला किया गया। सरकार के मुताबिक इससे करीब 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों और 4.5 करोड़ परिवारों को लाभ मिल सकता है।

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ अस्पताल में भर्ती होने और लंबे इलाज की जरूरत बढ़ सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य खर्च का बोझ उठाना बुजुर्ग परिवारों के लिए चुनौती बन सकता है। 

इलाज के खर्च से सुरक्षा

आयुष्मान भारत का सबसे बड़ा फायदा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए महंगे इलाज के खर्च से सुरक्षा को माना जाता है। मौजूदा समय में कैंसर, हृदय रोग, गंभीर सर्जरी और अन्य बिमारियों के इलाज में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं। ऐसे में 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य सुरक्षा किसी गरीब परिवार को कर्ज लेने या संपत्ति बेचने की स्थिति से बचाने में मदद कर सकता है।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार जून 2026 तक योजना के तहत 12.69 करोड़ अस्पताल दाखिले अधिकृत हुए और इनकी राशि 1.92 लाख करोड़ रुपये रही। सरकार ने इसे जेब से होने वाले स्वास्थ्य खर्च को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

सरकारी और निजी अस्पतालों का नेटवर्क

योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों को भी इसमें शामिल करना है। इससे लाभार्थियों के पास इलाज के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध होते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में जहां सरकारी अस्पतालों में बड़ी बिमारियों के उपचार के लिए सेवाएं सीमित हैं, वहां सूचीबद्ध निजी अस्पतालों का नेटवर्क उपयोगी साबित हो रहा है।

इंटर-स्टेट पोर्टेबिलिटी की सुविधा

इस योजना के अंतर्गत इंटर-स्टेट पोर्टेबिलिटी भी योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। इसका अर्थ है कि पात्र व्यक्ति अपने राज्य से बाहर जाकर भी सूचीबद्ध अस्पताल में योजना का लाभ ले सकता है। प्रवासी मजदूरों, दूसरे राज्यों में काम करने वाले लोगों और यात्रा के दौरान उपचार की जरूरत पड़ने वाले लाभार्थियों के लिए यह सुविधा विशेष महत्व रखती है।

योजना की दूसरी तस्वीर

जहां एक तरफ योजना से करोड़ों अस्पताल दाखिलों को वित्तीय सुरक्षा मिली है, वहीं इसके क्रियान्वयन को लेकर कई खामियां भी सामने आई हैं। CAG ने 2023 में PM-JAY के प्रदर्शन का ऑडिट किया था। यह ऑडिट सितंबर 2018 से मार्च 2021 तक की अवधि पर आधारित था। इसलिए इसकी सभी टिप्पणियों को 2026 की मौजूदा स्थिति का सीधा चित्र नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन इससे योजना के शुरुआती क्रियान्वयन की चुनौतियों का पता जरूर चलता है।

 CAG ने अस्पतालों पर लगाए गए जुर्माने की वसूली में कमी का मुद्दा उठाया था। रिपोर्ट के मुताबिक 13 राज्यों से जुड़े 184 डिफॉल्टिंग अस्पतालों पर लगाए गए 17.28 करोड़ रुपये के जुर्माने में से केवल 4.96 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी, जबकि 12.32 करोड़ रुपये की राशि वसूल की जानी बाकी थी। इसके अलावा तीन राज्यों में लाभार्थियों की शिकायतों से जुड़े 164 अस्पतालों पर लगाए गए 4.66 करोड़ रुपये के जुर्माने की भी वसूली लंबित थी।

फर्जी और संदिग्ध दावों की चुनौती

स्वास्थ्य बीमा जैसी बड़ी योजना में फर्जी लाभार्थियों और गलत दावों की संभावना हमेशा रहती है। CAG की बाद की एक राज्य-स्तरीय ऑडिट रिपोर्ट में भी योजना से जुड़े संदिग्ध भुगतान और कार्ड संबंधी गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया।

 बिहार से संबंधित CAG ऑडिट में मार्च 2024 के डेटा का विश्लेषण करते हुए 139 ऐसे आयुष्मान कार्डों के आधार पर 25.25 लाख रुपये के भुगतान का उल्लेख किया गया, जो संबंधित लाभार्थी डेटाबेस में मौजूद नहीं पाए गए। ऑडिट ने इन भुगतानों को संदिग्ध माना और अंतिम स्पष्टीकरण के लिए मामला संबंधित प्राधिकरण के पास भेजे जाने की बात दर्ज की।

हॉस्पिटल की निगरानी भी बड़ी चुनौती

योजना में सरकारी और निजी अस्पतालों को शामिल करने का फायदा तभी पूरी तरह मिल सकता है जब अस्पतालों की नियमित निगरानी हो। CAG की 2025 की एक ऑडिट रिपोर्ट में बिहार में कुछ अस्पतालों को निलंबित करने और बाद में डी-एम्पैनल करने की प्रक्रिया में देरी का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2020 से मार्च 2024 के बीच 23 निजी अस्पतालों को निलंबित किया गया था। इनमें से 13 को छह महीने की निर्धारित अवधि के बाद काफी देरी से डी-एम्पैनल किया गया।

 इससे यह संकेत मिलता है कि केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। अस्पतालों की गुणवत्ता, मरीजों के साथ व्यवहार, इलाज की वास्तविकता और दावों की सत्यता की लगातार निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।

सिर्फ बीमा से नहीं बदलेगी पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था

आयुष्मान भारत मुख्य रूप से अस्पताल में भर्ती होने वाले इलाज के खर्च से वित्तीय सुरक्षा देता है। लेकिन देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी चुनौती केवल अस्पताल का खर्च नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति, डॉक्टरों और नर्सों की उपलब्धता, दवाइयों की पहुंच, जांच सुविधाएं और ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।

 यही वजह है कि आयुष्मान भारत के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना भी जरूरी है। सरकार के अनुसार देश में 1.87 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित किए जा चुके हैं, जिनका उद्देश्य व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

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लाभार्थियों के सामने जागरूकता की समस्या

किसी भी सरकारी स्वास्थ्य योजना की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि लाभार्थी को अपने अधिकारों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी कितनी है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में कई लोग यह नहीं जानते कि वे योजना के पात्र हैं या किस अस्पताल में योजना के तहत इलाज मिल सकता है।

 कई बार दस्तावेज, कार्ड, पहचान सत्यापन और अस्पताल की प्रक्रिया भी आम व्यक्ति के लिए जटिल हो सकती है। ऐसे में अस्पतालों में प्रशिक्षित सहायता कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। CAG ने भी कुछ मामलों में लाभार्थियों की सहायता के लिए समर्पित और प्रशिक्षित कर्मियों की जरूरत पर जोर दिया है।

योजना को और प्रभावी बनाने के लिए क्या जरूरी?

आयुष्मान भारत योजना को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कुछ बिंदुओं पर लगातार काम करने की जरूरत है। सबसे पहले, फर्जी दावों और संदिग्ध अस्पतालों की पहचान के लिए डेटा एनालिटिक्स और रियल टाइम निगरानी को मजबूत किया जाना चाहिए। दूसरा, गलत दावों पर कार्रवाई और जुर्माने की वसूली में देरी नहीं होनी चाहिए।

तीसरा, अस्पतालों को केवल संख्या के आधार पर सूचीबद्ध करने के बजाय गुणवत्ता के आधार पर लगातार परखा जाना चाहिए। चौथा, लाभार्थियों के लिए शिकायत निवारण व्यवस्था को सरल और तेज बनाया जाना चाहिए। पांचवां, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पताल आधारित बीमा के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

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