

हैलोवीन हर साल 31 अक्टूबर को मनाया जाता है।
इसकी शुरुआत प्राचीन सेल्टिक त्योहार समहाइन से जुड़ी है।
भारत में युवा और बच्चे इस दिन को थीम पार्टी व कॉस्ट्यूम के साथ मनाते हैं।
Halloween in India: अक्टूबर माह का आखिरी दिन यानी 31 अक्टूबर दुनिया के कई देशों में हैलोवीन के नाम से जाना जाता है। इस दिन लोग डरावने और क्रिएटिव कॉस्ट्यूम पहनते हैं, कद्दू को काटकर उसमें डरावने चेहरे बनाते हैं और थीम पार्टी करते हैं।
फिल्मों और सोशल मीडिया की आसानी पहुंच के कारण भारत में भी हैलोवीन लुक और फैशन का क्रेज देखने को मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस त्योहार की शुरुआत कहां से हुई और हैलोवीन शब्द का असली मतलब क्या है?
हैलोवीन शब्द का संबंध ऑल हैलोज ईव से है। 'हैलोज' का मतलब पवित्र व्यक्ति या संत और 'ईव' का मतलब किसी खास दिन की पूर्व संध्या होता है। इस तरह हैलोवीन का अर्थ हुआ ऑल सेंट्स डे से एक रात पहले का समय। आज यह त्योहार डरावने कॉस्ट्यूम, कद्दू की सजावट, कैंडी और थीम पार्टियों के लिए जाना जाता है।
हैलोवीन की शुरुआत को आयरलैंड और आसपास के सेल्टिक क्षेत्रों में मनाए जाने वाले प्राचीन त्योहार समहाइन से जोड़ा जाता है। यह त्योहार फसल के मौसम के खत्म होने और सर्दियों की शुरुआत माना जाता है। सेल्टिक समुदाय 31 अक्टूबर की रात को अलाव जलाते थे और कुछ लोग खास तरह के कपड़े और मुखौटे पहनते थे, इसे बुरी आत्माओं से बचने की मान्यता माना जाता था।
समय के साथ इस पर ईसाईयों का प्रभाव पड़ा। 1 नवंबर को ऑल सेंट्स डे और 2 नवंबर को ऑल सोल्स डे मनाने की प्रथा शुरु हुई। इन धार्मिक दिनों की पूर्व संध्या को ऑल हैलोज ईव कहा गया, इसी से हैलोवीन नाम चलन में आया। बाद में आयरिश और स्कॉटिश लोगों के साथ यह प्रथा अमेरिका पहुंची और वहां कॉस्ट्यूम, कद्दू की सजावट और बच्चों के ट्रिक और ट्रीट का चलन लोकप्रिय हो गया।
हैलोवीन फैशन का मतलब सिर्फ डरावना दिखना नहीं है। लोग अपने कपड़ों, मेकअप और एक्सेसरीज के जरिए अलग-अलग किरदारों का लुक तैयार करते हैं। ब्लैक ड्रेस के साथ डार्क आई मेकअप, रेड लिपस्टिक, केप, हैट, लेस ग्लव्स और थीम ज्वेलरी से लुक तैयार किया जाता है।