मथुरा और वृंदावन का खाना अपनी शुद्धता और पारंपरिक मसालों के लिए जाना जाता है। यहां के खान-पान में दूध और घी का बहुतायत से प्रयोग होता है जो स्वाद को दोगुना कर देता है। होली के हुड़दंग के बीच जब आप थक जाएं तो ये पकवान आपकी थकान मिटाकर आपको ताजगी से भर देंगे।
मथुरा के मशहूर पेड़े: मथुरा की पहचान यहाँ के पेड़ों के बिना अधूरी है। भूरे रंग के ये पेड़े गाय के शुद्ध दूध के मावे से बनाए जाते हैं और इनमें इलायची का बेहतरीन स्वाद होता है। द्वारकाधीश मंदिर के आसपास आपको सबसे बेहतरीन पेड़े मिलेंगे।
वृंदावन की कचौड़ी-सब्जी: ब्रज की सुबह बिना कचौड़ी-सब्जी के पूरी नहीं होती। कुरकुरी कचौड़ी के साथ मिलने वाली हींग वाली आलू की सब्जी और ऊपर से डली हुई कद्दू की चटनी का स्वाद आपको बार-बार यहां आने पर मजबूर कर देगा।
केसरिया ठंडाई (होली स्पेशल): होली हो और ठंडाई न हो ऐसा तो मुमकिन ही नहीं। वृंदावन की केसरिया ठंडाई जिसमें बादाम, पिस्ता और गुलाब की पंखुड़ियाँ डाली जाती हैं तन और मन दोनों को ठंडक पहुँचाती है।
खमण और ढोकला: हालांकि यह गुजराती प्रभाव है लेकिन मथुरा में मिलने वाले नरम और स्पंजी खमण-ढोकले स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
रबड़ी और लस्सी: बांके बिहारी मंदिर की गलियों में मिलने वाली गाढ़ी लस्सी, जिसके ऊपर मलाई और रबड़ी की परत होती है यहां का मुख्य आकर्षण है। इसे मिट्टी के कुल्हड़ में पीने का अनुभव ही अलग है।
मकुटी और घेवर: मिठाइयों के शौकीनों के लिए यहां मकुटी (एक प्रकार की दाल की फिरनी) और होली के दौरान मिलने वाले घेवर का स्वाद लाजवाब होता है।
मलाई मक्खन: सर्दियों के अंत और होली की शुरुआत में मिलने वाला मलाई मक्खन बादलों जैसा हल्का और मीठा होता है। यह सुबह-सुबह बांके बिहारी मंदिर के पास अधिक मिलता है।