

Food Divorce Couples: एक ही घर, एक ही रसोई और एक ही रिश्ता, लेकिन खाने की प्लेट अलग-अलग, आजकल कई कपल्स की जिंदगी में ऐसा देखने को मिल रहा है। कोई पार्टनर शाकाहारी है तो दूसरा मांसाहारी, किसी को वेटलॉस करना है तो दूसरा सामान्य डाइट ले रहा है। किसी की ड्यूटी का समय अलग है, तो किसी को देर रात खाना पसंद है। ऐसे में दोनों का अलग खाना हर बार रिलेशन में प्रॉब्लम नहीं माना जाता है। इस सिचुएशन को फूड डिवोर्स कहते हैं।
‘Food Divorce’ का मतलब वास्तविक तलाक नहीं है। यह एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब एक कपल साथ रहते हुए भी अपनी खाने की पसंद, डाइट, समय या जरूरतों के कारण अलग-अलग खाना चुनता है। मसलन, एक पार्टनर रात के खाने में सलाद और प्रोटीन लेना चाहता है, जबकि दूसरा दाल-चावल या कोई फेवरेट कंफर्ट भोजन। ऐसे में दोनों का एक ही खाना खाना जरूरी नहीं है।
इसके पीछे कई सामान्य कारण हो सकते हैं। सबसे बड़ा कारण खाने की पसंद और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में अंतर है। किसी को एलर्जी हो सकती है, कोई वेट मैनेजमेंट पर ध्यान दे रहा हो सकता है या किसी की डाइट डॉक्टर ने अलग रखी हो। इसके अलावा काम का समय, एक्सरसाइज, धार्मिक या व्यक्तिगत खान-पान की पसंद और अलग-अलग स्वाद भी इसकी वजह हो सकती है।
रिश्ते की मजबूती इस बात से तय नहीं होती कि दोनों पार्टनर रोज एक ही खाना खाते हैं या नहीं। अगर दोनों एक-दूसरे की पसंद और जरूरतों का सम्मान करते हैं, तो अलग खाना किसी समस्या का कारण नहीं होना चाहिए। कई बार अलग खाना उल्टा तनाव कम कर सकता है। हर दिन पार्टनर की पसंद के अनुसार खाना बनाने या अपनी डाइट छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।
परेशानी तब हो सकती है जब खाना रिश्ते में बातचीत और साथ समय बिताने का माध्यम ही खत्म कर दे। अगर कपल लगातार अलग-अलग समय पर खाना खाते है, एक-दूसरे के साथ बैठने से बचते है या खाने के बहाने साथ समय बिताना बंद कर देते है, तो धीरे-धीरे भावनात्मक दूरी महसूस हो सकती है यानी समस्या अलग खाना नहीं, बल्कि साथ समय बिताने की कमी हो सकती है।
भारत में साथ बैठकर खाना खाना केवल भोजन करना नहीं, बल्कि परिवार के साथ समय बिताने का एक तरीका भी माना जाता है। कई घरों में रात का खाना परिवार के साथ बैठकर खाने की परंपरा होती है। इसलिए अगर कपल लगातार अलग-अलग खाने लगे, तो इसे केवल डाइट का फैसला मानना जरूरी नहीं। यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि क्या दोनों दिन में किसी दूसरे समय एक-दूसरे के साथ पर्याप्त समय बिता रहे हैं।
साथ में नाश्ता या चाय का समय तय किया जा सकता है।
सप्ताह में एक दिन दोनों मिलकर खाना बना सकते हैं।
कभी-कभार ऐसा भोजन चुना जा सकता है जिसे दोनों पसंद करते हों।
अगर समय अलग है, तो खाने के बाद साथ टहलना, बातचीत करना या बिना फोन के कुछ समय साथ बिताना।