सुबह अलार्म बंद करता युवक (सौ. फ्रीपिक)
Morning Routine And Success: दुनिया के कई बड़े सीईओ और मोटिवेशनल गुरु सुबह जल्दी उठने को सफलता की पहली सीढ़ी बताते हैं। लेकिन क्या यह नियम हर किसी पर लागू होता है। हालिया रिसर्च और विशेषज्ञों की राय इस सक्सेस मंत्र के पीछे एक अलग ही कहानी बयां करती है जो आपकी सोच बदल देगी।
हम अक्सर सुनते हैं कि जो सोवत है वो खोवत है लेकिन आधुनिक विज्ञान इस पर सवाल खड़े कर रहा है। दशकों से एप्पल के टिम कुक से लेकर भारत के बड़े उद्योगपतियों तक अर्ली बर्ड्स (जल्दी उठने वाले) होने का गुणगान किया जाता रहा है। मगर वैज्ञानिकों का कहना है कि सफलता का संबंध घड़ी की सुइयों से नहीं बल्कि आपके शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक से है।
हर इंसान का शरीर एक आंतरिक घड़ी के अनुसार काम करता है जिसे क्रोनोटाइप कहा जाता है। वैज्ञानिक मुख्य रूप से इंसानों को दो श्रेणियों में बांटते हैं लार्क्स (जो सुबह ऊर्जावान होते हैं) और आउल्स (जो रात में अधिक सक्रिय होते हैं)। जेनेटिक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर आप जन्मजात नाइय आउल हैं तो जबरदस्ती सुबह उठना आपकी कार्यक्षमता को बढ़ाने के बजाय घटा सकता है।
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अगर आपका शरीर सुबह जल्दी उठने के लिए नहीं बना है और आप सोशल मीडिया के दबाव में ऐसा कर रहे हैं तो आप सोशल जेट लैग का शिकार हो सकते हैं। इससे एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन और निर्णय लेने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। साइंस कहता है कि 8 घंटे की गहरी नींद किसी भी रूटीन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
अध्ययनों से पता चलता है कि सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप कितने बजे उठते हैं बल्कि इस पर निर्भर करती है कि आप जागने के बाद अपने पीक एनर्जी आवर्स का इस्तेमाल कैसे करते हैं। कई रचनात्मक लोग और तकनीकी विशेषज्ञ रात के सन्नाटे में सबसे बेहतर काम करते हैं।
सुबह उठना उन लोगों के लिए बेहतरीन है जिनका शरीर प्राकृतिक रूप से इसके लिए तैयार है। लेकिन अगर आप रात में बेहतर काम करते हैं तो खुद को अपराधी महसूस करना बंद करें। विज्ञान का सीधा संदेश है अपनी नींद पूरी करें और अपने सबसे ऊर्जावान समय में काम करें यही सफलता का असली विज्ञान है।