Clothing Label Guide: कपड़े खरीदने से पहले टैग पर जरूर चेक करें ये 7 बातें, बाद में नहीं होगा पछतावा

Clothing Label: कपड़े खरीदते समय सिर्फ डिजाइन, साइज और कीमत देखकर फैसला न करें। फैब्रिक की जानकारी, वॉशिंग इंस्ट्रक्शन, फिटिंग और MRP जैसी बातें चेक करने से आप अपने लिए सही आउटफिट चुन सकती हैं।
clothing label guide check before buying outfit.
क्लोदिंग लेबलफोटो, सोशल मीडिया
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Highlights:

  • कपड़े के टैग पर फैब्रिक कंपोजिशन देखकर समझें कि उसमें कॉटन, पॉलिएस्टर या विस्कोस कितना है।

  • वॉशिंग सिंबल और केयर इंस्ट्रक्शन से पता करें कि कपड़े को धोएं।

  • साइज, MRP, मैन्युफैक्चरर की जानकारी और रिटर्न पॉलिसी चेक करके खरीदारी का फैसला करें।

Clothing Shopping Tips: कपड़ों की शॉपिंग करते समय हमारा ध्यान डिजाइन, रंग, फिटिंग और डिस्काउंट पर रहता है। कोई कुर्ता पसंद आ जाए या ड्रेस पर अच्छी सेल मिल रही हो, तो हम बिना ज्यादा सोचे उसे खरीद लेते हैं। लेकिन घर पहुंचने के बाद पता चलता है कि कपड़े को बार-बार प्रेस करने की जरूरत, धुलाई में सिकुड़ जाता है या उसे संभालना उम्मीद से ज्यादा मुश्किल है।

ऐसी परेशानियों से बचने के लिए कपड़े खरीदने से पहले उसके टैग और लेबल पर लिखी जानकारी पढ़ना जरूरी है। इससे आपको फैब्रिक, देखभाल और कीमत से जुड़ी जरूरी बातें समझने में मदद मिलती है। अगली बार शॉपिंग पर जाएं, तो ये 7 चीजें जरूर चेक करें।

फैब्रिक कंपोजिशन: कपड़ा किस चीज से बना है?

सबसे पहले लेबल पर फैब्रिक कंपोजिशन या मैटेरियल की जानकारी देखें। यहां 100% कॉटन, पॉलिएस्टर, विस्कोस, रेयॉन, लिनेन या स्पैंडेक्स लिखे होते हैं। अगर कपड़े में दो या अधिक फाइबर हैं, तो उनकी प्रतिशत मात्रा भी देखें।

  • कॉटन: रोजमर्रा के कपड़ों और गर्म मौसम के लिए उपयोगी है। इसमें सिलवटें पड़ सकती हैं और कुछ कपड़े धुलाई में सिकुड़ सकते हैं।

  • पॉलिएस्टर: आमतौर पर जल्दी सूखता है और कम सिकुड़ता है, लेकिन गर्मी के मौसम के लिए यह उपयुक्त नहीं माना जाता है।

  • विस्कोस या रेयॉन: इसका फैब्रिक अक्सर मुलायम और अच्छी ड्रेप वाला होता है। इसे धोते समय विशेष सावधानी बरतें।

  • स्पैन्डेक्स या इलास्टेन: इसकी थोड़ी मात्रा भी कपड़े में खिंचाव लाती है। यह लेगिंग्स, स्ट्रेचेबल जींस और फिटेड टॉप में उपयोगी होता है।

साइज लेबल: सिर्फ S, M या L देखकर न खरीदें

किसी ब्रांड में M साइज फिट हो सकता है, जबकि दूसरे ब्रांड में वही साइज टाइट या ढीला हो सकता है। इसलिए साइज टैग के साथ चेस्ट, कमर, हिप्स और लंबाई के माप भी देखें। ऑनलाइन खरीदारी में ब्रांड का साइज चार्ट जरूर चेक करें। कुर्ता, जींस, ड्रेस या ब्लाउज खरीदते समय यह भी देखें कि डिजाइन बॉडी-फिटेड है, रेगुलर फिट है या ओवरसाइज्ड।

वॉशिंग इंस्ट्रक्शन के सिंबल को समझें

  • पानी के टब का निशान: कपड़ा धोने से जुड़ी जानकारी देता है। टब में लिखी संख्या अधिकतम धुलाई तापमान बताती है।

  • टब में हाथ का निशान: आमतौर पर हाथ से धोने का निर्देश है।

  • क्रॉस लगा ट्रायंगल: ब्लीच का इस्तेमाल न करें।

  • प्रेस का निशान: कपड़े को प्रेस करने से जुड़ी जानकारी देता है। डॉट्स तापमान का संकेत देते हैं।

  • क्रॉस लगा ड्रायर का निशान: टम्बल ड्रायर का इस्तेमाल न करें।

एमआरपी और डिस्काउंट: असली कीमत समझें

कपड़े पर लगे प्राइस टैग में एमआरपी देखें। डिस्काउंट के बाद मिलने वाली कीमत की तुलना इससे करें और बिल में लिखी राशि भी जांचें। पैकेज्ड कपड़ों पर लागू नियमों के अनुसार एमआरपी और अन्य जरूरी घोषणाएं निर्धारित होती हैं। सिर्फ बड़ा डिस्काउंट देखकर खरीदारी न करें।

मैन्युफैक्चरर और कंट्री ऑफ ओरिजिन की जानकारी

लेबल या पैकेजिंग पर ब्रांड, निर्माता, आयातक और देश से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होती है। खासकर इंपोर्टेड कपड़े खरीदते समय कंट्री ऑफ ओरिजिन और आयातक की जानकारी देखें।

रंग, सिलाई और फिनिशिंग भी जांचें

लेबल पढ़ने के साथ कपड़े को ध्यान से देखना भी जरूरी है। सिलाई के खुले धागे, कमजोर बटन, खराब जिप, असमान हेमलाइन या कपड़े पर दाग जैसी कमियां जांचें। फेस्टिव आउटफिट, कढ़ाई वाले सूट या पार्टी ड्रेस खरीदते समय अस्तर, जरी, सीक्विन और अन्य सजावटी हिस्सों की सिलाई भी देखें।

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रिटर्न और एक्सचेंज पॉलिसी जरूर पढ़ें

यह जानकारी अक्सर कपड़े के लेबल के बजाय दुकान की पॉलिसी, बिल या ऑनलाइन प्रोडक्ट पेज पर मिलती है। इसलिए खरीदने से पहले पूछ लें कि कपड़ा वापस किया जा सकता है या केवल एक्सचेंज होगा।

ऑनलाइन शॉपिंग में रिटर्न की समय-सीमा, रिफंड के नियम, रिटर्न शिपिंग चार्ज और टैग हटाने से जुड़ी शर्तें पढ़ें।

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