Working Moms: ऑफिस जॉइन करने के बाद भी ऐसे जारी रखें ब्रेस्टफीडिंग, बच्चे की सेहत से नहीं करना पड़ेगा समझौता

Breastfeeding After Maternity Leave: मैटरनिटी लीव खत्म होने के बाद ऑफिस जॉइन करना नई मांओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सही प्लानिंग और कुछ आसान टिप्स अपनाकर आप स्तनपान करा सकती हैं।
Breastfeeding tips for working moms after maternity leave
वर्किंग मदर (सोर्स. सोशळ मीडिया)
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Breastfeeding Tips For Working Moms: नई कामकाजी मांओं की चिंता बच्चे के जन्म के बाद नहीं बल्कि मैटरनिटी लीव खत्म होने के बाद शुरु होती है। ऑफिस लौटना हर मां के लिए इमोशनली, मेंटली और फिजिकली चुनौतीपूर्ण होता है।

नई मांओं की सबसे बड़ी चिंता बच्चे को मां का दूध पिलाने की होती है। हालांकि, सही प्लानिंग, थोड़ी तैयारी और कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर वर्किंग मॉम्स भी लंबे समय तक ब्रेस्टफीडिंग करा सकती हैं।

ऑफिस जॉइन करने से पहले करें तैयारी

अगर आप कुछ हफ्तों बाद ऑफिस जॉइन करने वाली हैं, तो पहले से ही अपनी दिनचर्या उसके अनुरूप व्यवस्थित करना शुरू करें। बच्चे को दूध निकालकर यानी एक्सप्रेस्ड ब्रेस्ट मिल्क पिलाने की आदत धीरे-धीरे डालें, ताकि आपके ऑफिस जाने के बाद उसे परेशानी न हो।

ब्रेस्ट मिल्क निकालकर स्टोर करें

ऑफिस जाने से पहले और जरूरत पड़ने पर ऑफिस में भी ब्रेस्ट पंप की मदद से दूध निकाल कर स्टोर किया जा सकता है। इसे साफ और स्टरलाइज्ड कंटेनर में स्टोर करें। दूध को सही तापमान पर रखने से उसकी गुणवत्ता बनी रहती है और बाद में बच्चे को सुरक्षित तरीके से पिलाया जा सकता है।

ऑफिस में पंपिंग के लिए समय निकालें

अगर लंबे समय तक दूध नहीं निकाला जाए तो नई मांओं के स्तनों में दर्द, सूजन या धीरे-धीरे मिल्क प्रोडक्शन कम होने की समस्या होने लगती है। ऑफिस में हर 3–4 घंटे के अंतराल पर कुछ मिनट निकालकर पंपिंग करने की कोशिश करें। इससे दूध शिशु के लिए पर्याप्त मात्रा में बनेगा।

बच्चे को ऑफिस जाने से पहले और लौटने के बाद दूध पिलाएं

ऑफिस निकलने से ठीक पहले बच्चे को स्तनपान कराएं। घर लौटने के बाद भी सबसे पहले बच्चे को दूध पिलाएं। इससे मां और बच्चे का भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत रहता है और दूध की सप्लाई भी बेहतर बनी रहती है।

अपनी डाइट और पानी का रखें ध्यान

स्तनपान कराने वाली महिलाओं को संतुलित आहार लेना चाहिए। भोजन में प्रोटीन, हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, दूध और सूखे मेवे शामिल करें। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि शरीर में पानी की कमी दूध बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इसलिए ऑफिस में भी खान-पान का विशेष ध्यान रखें।

पर्याप्त आराम भी है जरूरी

डिलीवरी के बाद शरीर को पूरी तरह सामान्य होने में समय लगता है। ऐसे में नौकरी के साथ-साथ पर्याप्त नींद और आराम भी जरूरी है। परिवार के अन्य सदस्यों की मदद लेने में संकोच न करें।

तनाव से बचें

ऑफिस और घर की दोहरी जिम्मेदारियों के बीच तनाव बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन अत्यधिक तनाव से हार्मोनल बदलाव होता है, जिसका असर दूध बनने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। गहरी सांस लेने, हल्की वॉक, योग या मेडिटेशन जैसी गतिविधियां तनाव कम करने में मदद कर सकती हैं।

सही केयरगिवर चुनें

अगर बच्चा घर पर रहता है, तो उसकी देखभाल करने वाले व्यक्ति को एक्सप्रेस्ड ब्रेस्ट मिल्क को सुरक्षित तरीके से स्टोर करने और बच्चे को सही तरीके से पिलाने की जानकारी दें।

ब्रेस्ट पंप और जरूरी सामान साथ रखें

ऑफिस बैग में इलेक्ट्रिक या मैनुअल ब्रेस्ट पंप, मिल्क स्टोरेज बैग, आइस पैक, इंसुलेटेड बैग और अतिरिक्त नर्सिंग पैड जरूर रखें। इससे ऑफिस में भी दूध निकालना और सुरक्षित रखना आसान होगा।

कब लें डॉक्टर की सलाह?

अगर आपको इनमें से कोई समस्या हो, तो डॉक्टर या लैक्टेशन कंसल्टेंट से संपर्क करना चाहिए।

  • दूध बहुत कम बनना
  • स्तन में लगातार दर्द या सूजन
  • बुखार के साथ ब्रेस्ट में गांठ महसूस होना
  • बच्चे का वजन ठीक से न बढ़ना
  • स्तनपान के दौरान अत्यधिक दर्द होना
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