

Botsitting Workplace Trend: आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को दफ्तरों में काम का बोझ कम करने और समय बचाने के लिए शुरु किया गया था, लेकिन अब एक नया शब्द ‘Botsitting’ सामने आया है। यह बताता है कि एआई से काम करवाने के बाद भी वर्कर्स को एआई के परिणाम की निगरानी, उसकी जांच और उसके काम की क्वालिटी को सुधारने में काफी समय लग रहा है।
बॉटसिटिंग का मतलब है एआई के काम पर नजर रखना और उसके रिजल्ट को उपयोग लायक बनाने के लिए लगातार इंसान को भी लगना पड़ रहा है यानी एआई ने काम का पहला मसौदा तैयार कर दिया, लेकिन वर्कर को यह देखना पड़ता है कि उसमें गलती तो नहीं है, जानकारी सही है या नहीं और उसे फाइनल से पहले किस बदलाव की जरूरत है।
ग्लेन के वर्क एआई इंडेक्स, 2026 के अनुसार, डिजिटल कर्मचारी एआई की मदद से हर सप्ताह औसतन करीब 11 घंटे बचाते हैं, लेकिन लगभग 6.4 घंटे एआई की निगरानी में खर्च हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एआई के साथ बिताए कुल समय का लगभग 37 प्रतिशत हिस्सा ‘बॉटसिटिंग’ में जा रहा है। इसमें एआई को कंटेक्स्ट देना, बार-बार कमांड बदलना, जवाबों की तुलना करना, गलतियों को ठीक करना शामिल है।
मान लीजिए किसी कर्मचारी ने एआई से रिपोर्ट तैयार करने को कहा। एआई ने रिपोर्ट बना दी, लेकिन उसमें गलत आंकड़ा या अधूरी जानकारी हो सकती है। इसके बाद कर्मचारी को निम्न काम करना पड़ता है-
तथ्यों की जांच करनी पड़ती है
गलत जानकारी सुधारनी पड़ती है
भाषा और शैली ठीक करनी पड़ती है
एआई को अतिरिक्त कंटेक्स्ट देना पड़ता है
जरूरत पड़ने पर निर्देश दोबारा लिखना पड़ता हैं
लास्ट उसकी पूरी समीक्षा करनी पड़ती है
यह जरूरी नहीं कि एआई का इस्तेमाल हमेशा नुकसानदायक हो। कई शोध बताते हैं कि एआई से प्रोडक्टिविटी बढ़ती है, लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब एआई से मदद लेने के बाद अधिकतर समय उसके रिजल्ट की पुष्टि करने में चली जाए। ऐसे में कंपनी को लगता है कि कर्मचारी एआई से तेजी से काम कर रहा है, जबकि कर्मचारी एआई से मिले डेटा को सुधार रहा होता है।