
Anti-Aging Ingredients: उम्र बढ़ने के साथ झुर्रियां, महीन रेखाएं, झाइयां, रूखापन और स्किन इलास्टिसिटी कम होने लगती है। बाजार में एंटी-एजिंग के नाम पर कई तरह के प्रोडक्ट उपलब्ध है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ ऐसे इंग्रेडिएंट्स हैं, जो वाकई में त्वचा की देखभाल करके स्किन में उम्र के साथ आने वाले बदलावों को कम करते हैं।
अगर आप त्वचा पर उम्र बढ़ने के असर को धीमा करना चाहते हैं, तो सनस्क्रीन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सूर्य की यूवीए किरणें त्वचा पर झुर्रियां, झाइयां और त्वचा की इलास्टिसिटी कम करती हैं, जबकि यूवीबी किरणें त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं। त्वचा विशेषज्ञ आमतौर पर एसपीएफ 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।
रेटिनॉल और रेटिनॉइड्स एंटी-एजिंग प्रोडक्ट हैं। यह त्वचा की नई कोशिकाओं के बनने में मदद करता है और कोलेजिन प्रोडक्शन को भी बढ़ाता है। देखभाल में सबसे ज्यादा अध्ययन किए गए सक्रिय घटकों में शामिल हैं। इनके इस्तेमाल से कुछ लोगों को लालिमा, रूखापन, जलन या त्वचा में संवेदनशीलता महसूस हो सकती है। इसलिए इन्हें धीरे-धीरे त्वचा की दिनचर्या में शामिल करना बेहतर होता है।
डिफेंसिन एक तरह का पेपटाइड है, जो स्किन पर महीन रेखाओं, झुर्रियों, त्वचा की बनावट, ढीली त्वचा, झाइयों और ओपन पोर्स को कम करता है। इनके इस्तेमाल के 4 से 8 सप्ताह में स्किन पर बदलाव दिखाई देने लगते हैं।
विटामिन सी एक प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट है, जो मुक्त कणों से होने वाले नुकसान को कम करने और त्वचा के पिगमेंटेशन को सुधारने में मदद कर सकता है। इसे सुबह सनस्क्रीन के नीचे इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है।
उम्र बढ़ने के साथ त्वचा में हायलूरोनिक एसिड की मात्रा कम हो सकती है। इससे त्वचा कम भरी-भरी और ज्यादा रूखी दिखाई देती है। हायलूरोनिक एसिड त्वचा में नमी को लॉक रखता है।
सेरामाइड्स त्वचा की नेचुरल प्रोटेक्शन लेयर को मजबूत रखता है। उम्र के साथ इनके प्रोडक्शन में कमी आती है। सेरामाइड्स त्वचा में नमी बनाए रखने और बाहरी परत को सुरक्षित करता है। इसे हायलूरोनिक एसिड के साथ स्किन केयर रूटीन में शामिल किया जाना चाहिए।