मंगला गौरी व्रत के साथ प्रदोष का अद्भुत संयोग, इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा
Pradosh Vrat: साल 2025 में कई वर्षों बाद मंगला गौरी व्रत और प्रदोष व्रत एक साथ पड़ रहे हैं। ऐसे में यह एक अद्भुत संयोग से कम नहीं हैं। इस दिन शिव की पूजा से जातक की शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
सावन महीने का पहला प्रदोष व्रत (सौ.सोशल मीडिया)
Pradosh Vrat 2025: 22 जुलाई को सावन महीने का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इसके साथ, मंगला गौरी व्रत का भी संयोग बन रहा है। ज्योतिषयों के अनुसार, प्रदोष व्रत को भगवान शिव की पूजा के लिए बहुत ही शुभ एवं पुण्यदायी माना जाता है। प्रदोष व्रत के दिन शाम को भगवान शिव की पूजा करने का विधान है।
इसके साथ ही इसी दिन मंगला गौरी व्रत भी है, जो महागौरी के प्रति समर्पित त्योहार माना गया है। ऐसे में इस दिन पूजा-उपासना करने से जातक को भगवान शिव के साथ ही महागौरी का भी आशीर्वाद मिलेगा।
ज्योतिषयों का कहना है कि, साल 2025 में कई वर्षों बाद मंगला गौरी व्रत और प्रदोष व्रत एक साथ पड़ रहे हैं। ऐसे में यह एक अद्भुत संयोग से कम नहीं हैं। इस दिन पूरे शिव परिवार का पूजन जातक को शुभ फल की प्राप्ति कराता है। आइए जानते हैं इस बार सावन का पहला प्रदोष व्रत किस दिन पड़ रहा है।
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सावन प्रदोष व्रत की तिथि और समय
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार सावन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 22 जुलाई को सुबह 7:05 बजे होगा और यह तिथि 23 जुलाई को सुबह 4:39 बजे तक मान्य रहेगी। प्रदोष व्रत का पालन 22 जुलाई को ही किया जाएगा।
द्विपुष्कर योग और अन्य शुभ संयोग
22 जुलाई को द्विपुष्कर योग का भी संयोग बन रहा है, जो सुबह 5:37 से 7:05 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि इस योग में किया गया कोई भी कार्य या पूजा दोगुना फल देती है।
मंगला गौरी व्रत का विशेष योग
इस दिन मंगला गौरी व्रत भी पड़ रहा है, जो विशेष रूप से विवाहित महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए शुभ होता है। मां पार्वती की आराधना से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और विवाह योग्य कन्याओं को योग्य जीवनसाथी मिलते हैं।
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ये है प्रदोष काल पूजा का शुभ मुहूर्त
इस दिन पूजा के लिए प्रदोष काल का समय शाम 7:18 बजे से रात 9:22 बजे तक शुभ रहेगा। साथ ही दिन के अन्य शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:14 से 4:56 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:55 बजे तक
