कलयुग का एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर, यहां बढ़ती जा रही हैं नंदी महाराज की मूर्ति, दिया महाप्रलय आने का संकेत
क्या आपने कभी श्री यांगती उमा महेश्वर मंदिर के बारे में सुना है कभी दर्शन किए है। इस मंदिर का जिक्र कुछ समय पहले सामने आई फिल्म पुष्पा 2 में हुआ है। इस मंदिर का रहस्य इतना गहरा हैं कि, कलयुग के अंत का इशारा देता है।
- Written By: दीपिका पाल
भगवान शिव का रहस्यमयी मंदिर (सौ.सोशल मीडिया)
Yaganti Uma Maheshwar Temple: भारत में वैसे तो कई प्रसिद्ध मंदिर है जो अपनी खासियत रखते हैं। यहां पर विशेष रूप से भगवान जी की पूजा होने के साथ ही इन प्राचीन मंदिर की मान्यता और रहस्य भी जानने के लिए मिलते है। भगवान शिव के कई प्रसिद्ध मंदिरों के बारे मे तो आप जानते ही है लेकिन क्या आपने कभी श्री यांगती उमा महेश्वर मंदिर के बारे में सुना है कभी दर्शन किए है। इस मंदिर का जिक्र कुछ समय पहले सामने आई फिल्म पुष्पा 2 में हुआ है। इस मंदिर का रहस्य इतना गहरा हैं कि, कलयुग के अंत का इशारा देता है।
जानिए कहां पर स्थित है ये रहस्यमयी मंदिर
यह भगवान शिव का रहस्यमयी श्री यांगती उमा महेश्वर मंदिर है जो हैदराबाद से 308 किमी और विजयवाड़ा से 359 किमी दूर आंध्र प्रदेश के कुरनूल में स्थित है। जहां पर इस मंदिर का निर्माण वैष्णव परंपराओं के अनुसार किया गया है. इसे 15वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के संगम वंश के राजा हरिहर बुक्का राय के द्वारा बनवाया गया था। इस मंदिर यह प्राचीन काल के पल्लव, चोल, चालुक्य और विजयनगर शासकों की परंपराओं को दर्शाता है। यानि इस मंदिर की खासियत को काफी प्राचीन है।
आखिर क्यों बढ़ रहा है नंदी महाराज का आकार
आपको बताते चलें कि, भगवान शिव के इस मंदिर में नंदी देव की मूर्ति से जुड़ा रहस्य सुनने के लिए मिलता है। लोगो के साथ ही यहां पर वैज्ञानिकों का कहना हैं कि, यहां स्थित मूर्ति का आकार हर 20 साल में करीब एक इंच बढ़ता है. जिसकी वजह से एक-एक करके मंदिर के खंभों को हटाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं कलयुग का नाता इस मंदिर से रहा है जहां पर कलयुग के अंत तक यह मूर्ति एक विशाल रूप लेकर जीवित हो जाएगी और उस दिन महाप्रलय आएगा जिसके बाद कलयुग का अंत हो जाएगा।
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बताया जाता है कि, मंदिर में कभी भी कौए नजर नहीं आते है,कहा जाता है कि ऐसा ऋषि अगस्त्य के श्राप के कारण है। बताया जाता है कि, यहां पर भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर बनवाना चाहते थे, लेकिन स्थापना के दौरान मूर्ति का अंगूठा टूट गया. जिसके बाद अगस्त ऋषि ने भगवान शिव की आराधना की जिसके बाद भगवान शिव प्रकट हुए।
