आटे-सब्जी पर आफत, इफ्तारी का भी नहीं हो रहा जुगाड़, रमजान में महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तानी

पाकिस्तान में सिर्फ फलों की कीमत ही नहीं बल्कि सब्जियों की कीमतें भी आसमान छू रही है। रमजान से पहले ही राशन की दुकानों में आटा, चावल, दाल और बेसन की कमी हो गई है।
पाकिस्तान में खाने की चीजों की कीमतों में भारी इजाफा
प्रतीकात्मक तस्वीर
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इस्लामाबाद: एक मार्च, शनिवार से रमजान का महीना शुरू हो चुका है। इस दौरान इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग रोजा रखते हैं। रोजा शाम को खत्म होता है और उसके बाद इफ्तारी होती है। इफ्तारी के दौरान तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। मुस्लिम देशों में बड़ी धूमधाम के साथ इफ्तारी मनाई जाती है। हालांकि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के लिए इफ्तारी बड़ी महंगी पड़ रही है। पाकिस्तान में इफ्तारी के लिए जरूरी सामान की कीमतें आसमान छू रही है

पाकिस्तान में रमजान से पहले ही फल, सब्जी और मीट की कीमतों में काफी इजाफा हो चुका है। वहीं पाकिस्तान की न्यूज वेबसाइट समा टीवी के अनुसार पिछले तीन दिनों की तुलना में कीमतों में काफी अंतर आया है। लहसुन, टमाटर, केले और सेब की कीमतें कई गुना अधिक हो गई हैं। लाहौर में सेब 335 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। जबकि अंडे के दाम 200 रुपये से बढ़कर 290 रुपये तक पहुंच गया है। पाकिस्तान में मीट भी 800 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।

पिछले छह महीने में स्थिति बेहद खराब

पाकिस्तान में सिर्फ फलों की कीमत ही नहीं बल्कि सब्जियों की कीमतें भी आसमान छू रही है। रमजान से पहले ही राशन की दुकानों में आटा, चावल, दाल और बेसन की कमी हो गई है। ऐसे में रेट बढ़ना स्वाभाविक है। दुकानदारों के अनुसार पिछले 6 महीने से स्थिति बेहद खराब हो गई है और ग्राहकों की लंबी कतारें लगी हैं। ग्राहक स्थानीय बड़े बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं और अधिक कीमतों वाले सामान खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं। अभी भी लोगों को कोई राहत की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है, क्योंकि सरकार ने कुछ बड़ा कदम नहीं उठाया है।

सहरी और इफ्तार क्या है?

रमजान के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्य उदय से पहले सहरी करते हैं। उसके बाद नमाज पढ़ी जाती है। फिर वे दिनभर रोजा रखते हैं। शाम के समय में जब सूर्य ढलता है तो उसके बाद खजूर खाकर रोजा खोलते हैं। फिर शाम की नमाज पढ़ी जाती है। उसके बाद इफ्तार शुरू होता है। इफ्तार के लिए स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं। लोग अपने परिजनों, दोस्तों और शुभ​ चिंतकों के साथ इफ्तार करते हैं।

इस्लामिक मान्यता के अनुसार पवित्र रमजान के महीने में ईमानदारी से कमाए गए पैसों से सहरी और इफ्तार की जाती है। 1 मार्च को रमजान का चांद दिखने के साथ ही तरावीह शुरू हो गई है और इसी दिन से माहे रमजान की शुरुआत हो गई जबकि 2 मार्च से पहला रोजा रखा गया।

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