
संत रविदास जयंती(सौ.सोशल मीडिया)
Saint Ravidas Jayanti 2025: आज पूरे देशभर में संत रविदास जी की जयंती मनाई जा रही है। भारत की धरती पर कई महान गुरु हुए। जिनमें से एक थे संत रविदास। जिनके वचनों ने दुनियाभर में परचम लहराया। इनकी वाणी में इतनी ताकत थी कि जो भी उन्हें सुनता था उनका मुरीद हो जाता था।
हर वर्ष माघ महीने की पूर्णिमा तिथि पर ‘संत रविदास’ (Sant Guru Ravidas Jayanti) की जयंती मनाई जाती है। यह जयंती खासकर ‘गुरु संत रविदास’ के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। गुरु रविदास 15वीं सदी के महान संत, दार्शनिक, कवि, समाज सुधारक और ईश्वर के अनुयायी थे।
आपको बता दें कि गुरु रविदास जी ने अपने वचनों और दोहों से भक्ति की ऐसी अलौकिक ज्योति जलाई जो आज भी सभी को रोशन कर रही है। इस महान संत को दुनिया आज भी याद करती हैं और उनके सम्मान में हर साल रविदास जयंती का पर्व मनाती हैं। आइए जानते हैं संत रविदास जयंती के अवसर उनके अनमोल विचार-
जानिए संत रविदास के अनमोल विचार
1. संत रविदास जी के द्वारा कहा गया कथन ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ सबसे ज्यादा प्रचलित है। जिसका अर्थ है कि अगर मन पवित्र है और जो अपना कार्य करते हुए, ईश्वर की भक्ति में तल्लीन रहते हैं उनके लिए उससे बढ़कर कोई तीर्थ नहीं है।
2. संत रविदास जी के अनुसार किसी भी व्यक्ति के ऊंच-नीच का आकलन जाति से नहीं किया जाना चाहिए। व्यक्ति के कर्म ही ऊंच-नीच के विषय में बताते हैं।
3. रविदास जी ने बताया है कि ईश्वर की भक्ति करने का मौका बड़े ही भाग्य से मिलता है। व्यक्ति के मन में यदि कोई अभिमान नहीं हो तो उसका जीवन सदैव सफल रहता है।
4. गुरु रविदास जी कहते हैं कि ज्यादा धन का संचय, अनैतिकता पूर्वक व्यवहार करना और दुराचार करना गलत बताया है।
5. इसके अलावा अंधविश्वास, भेदभाव और छोटी मानसिकता के घोर विरोधी थे। और कभी भी अपने अंदर अभिमान को जन्म न लेने दें। इस छोटी सी चींटी शक्कर के दानों को उठा सकती है, परंतु एक हाथी इतना विशालकाय और ताकतवर होने के बाद भी ऐसा नहीं कर सकता।
धर्म की खबरें जानने के लिए क्लिक करें –
रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच।
नकर कूं नीच करि डारी है, ओछे करम की कीच।।
इसका अर्थ है कि ‘कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा अपने जन्म के कारण नहीं, बल्कि अपने कर्म के कारण होता है। व्यक्ति के कर्म ही उसे ऊंचा या नीचा बनाते हैं। संत रविदास जी सभी को एक समान भाव से रहने की शिक्षा देते थे।






