मां दुर्गा का एक ऐसा मंदिर जहां नहीं है कोई मूर्ति, आंखों पर पट्टी बांधकर क्यों की जाती है पूजा
Ambaji Temple: गुजरात के बनासकांठा में मौजूद अंबाजी माता का एक ऐसा मंदिर है जहां, कोई मूर्ति नहीं है। इस मंदिर में पवित्र श्री चक्र की पूजा मुख्य रूप से की जाती है।
- Written By: सीमा कुमारी
यहां देवी की मूर्ति नहीं ( सौ.सोशल मीडिया)
Shardiya Navratri 2025: पूरे देशभर में शारदीय नवरात्रि का महापर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस महापर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह और उमंग देखी जाती है। भक्त गण मां दुर्गा की भक्ति में सराबोर होकर मां की भक्ति कर रहे हैं। अगर बात नवरात्रि त्योहार की करें तो हिन्दू धर्म में नवरात्रि का त्योहार बड़े ही धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ पूरे देशभर में मनाया जाता है। क्योंकि, भारत विविधताओं वाला का देश है और यही विविधता हमारे त्योहारों में भी झलकती है।
आज हम बात कर रहे हैं भारत की ऐसी जगहों के बारे में, जिसका अपना एक अलग ही धार्मिक महत्व है। माउंट आबू से 45 किमी। दूर अम्बा माता का प्राचीन शक्तिपीठ मंदिर की है। 51 शक्तिपीठों में शामिल गुजरात और राजस्थान की सीमा पर स्थित इस मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है। फिर यहां नवरात्रि के दिनों में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। आइए जानते है इस मंदिर के बारे में-
ऐसा मंदिर जहां नहीं है कोई मूर्ति
आपको बता दें कि, 51 शक्तिपीठों में मंदिरों में अम्बाजी का यह मंदिर गुजरात के बनासकांठा में स्थित है। यह मंदिर जगत की देवी अम्बा मां को समर्पित है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है कि इस मंदिर में देवी की कोई छवि या मूर्ति नहीं है।
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यहां पवित्र “श्री विजय यंत्र” की पूजा मूर्ति के बजाय मुख्य देवता के रूप में की जाती है। कोई भी नग्न आँखों से इस यंत्र को नहीं देख सकता है।
यही कारण है कि यहां आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा करने की परंपरा है। साथ ही, यहां फोटोग्राफी करने की भी सख्त मनाही है।
क्या है इस मंदिर के पीछे पौराणिक मान्यता
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुजरात के बनासकांठा में स्थित यह मंदिर नौ देवियों में से एक, अम्बा देवी को समर्पित है। इस मंदिर के पीछे एक पौराणिक मान्यता है। जिसके अनुसार, जब दक्ष द्वारा भगवान शिव के अपमान से आहत होकर माता सती ने यज्ञ-अग्नि कुंड में कूदकर अपनी प्राणों की आहुति दे थी।
उसके बाद भगवान शंकर ने यज्ञकुंड से सती के पार्थिव शरीर को निकाल कंधे पर उठा लिया और दुखी हुए इधर-उधर घूमने लगे। इस बीच भगवान विष्णु ने चक्र से सती के शरीर को काट दिया। माता सती के शरीर के टुकड़े जहां-जहां गिरे वह सभी स्थान 51 शक्तिपीठ कहलाए। इस स्थान पर माता सती का हृदय गिरा था इसलिए यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल है।
नवरात्रि और दिवाली के दौरान यहाँ भक्तों का लगा रहता ताँता
आपको बता दें, नवरात्रि और दिवाली के दौरान यहाँ भक्तों का ताँता लगा रहता है। यह न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि प्राकृतिक नजारों से भी भरपूर है। अंबाजी माता मंदिर के आस-पास कई पर्यटन स्थल हैं, जहाँ पर्यटक घूमने जाते हैं।
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यह स्थान अरावली पर्वतमाला के घने जंगलों से घिरा हुआ है। आदि मंदिर के आस-पास गब्बर हिल, कैलाश टेकरी, कुंभारिया आदि जैसे दर्शनीय स्थल भी मौजूद हैं। यहां आप आस्था के साथ-साथ पर्यटन का भी लुफ्त उठा सकते हैं।
