Shibu Soren: जब शिबू सोरेन ने महाराष्ट्र से लिया पंगा, नेताओं को किया था चैलेंज
Shibu Soren threatens Maharashtra: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन नहीं रहे। महाराष्ट्र से उनका बड़ा गहरा और आक्रामक संबंध रहा है।
- Written By: प्रिया जैस
शिबू सोरेन (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Shibu Soren threatens Maharashtra: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक नहीं रहे। 4 अगस्त 2025 को शिबू सोरेन का 81 वर्ष की उम्र में दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। किडनी की बीमारी के चलते वे जून के आखिरी सप्ताह से अस्पताल में भर्ती थे और उनका इलाज जारी था।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का महाराष्ट्र से भी कनेक्शन रहा है। उन्होंने आदिवासी और उत्तर-भारतीय लोगों की मदद के लिए हमेशा अपना हाथ आगे बढ़ाया। उत्तर-भारतीयों की मदद के लिए उन्होंने महाराष्ट्र से तक बैर लेने में जरा-सी भी हिचकिचाहट नहीं दर्शायी।
शिबू सोरेन ने लिया एक्शन
दरअसल, साल 2008 में महाराष्ट्र में उत्तर-भारतीयों के खिलाफ हिंसा का दौर जारी हो गया था। लोगों पर हो रही हिंसा को देखते हुए सबसे पहले झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप साही ने विरोध किया था। उत्तर भारतीयों पर हमलों के खिलाफ आवाज उठाते हुए उन्होंने कहा था कि एक भारतीय होने के नाते, हर नागरिक को देश में कहीं भी रहने का अधिकार है। एक राज्य दूसरे राज्यों की समृद्धि में योगदान देता है।
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यह बात शिबू सोरेन ने भी गंभीरता से ली और उन्होंने महाराष्ट्र को चेतावनी दे डाली। झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने धमकी दी है कि अगर राज्य में उत्तर भारतीयों के खिलाफ हिंसा जारी रही तो महाराष्ट्र को खनिजों की आपूर्ति रोक दी जाएगी।
महाराष्ट्र को दी थी चेतावनी
शिबू सोरेन ने रांची में मीडिया के जरिए महाराष्ट्र को ललकारा था और कहा था कि अगर उत्तर भारतीयों के खिलाफ हिंसा जारी रही तो हम महाराष्ट्र को खनिजों की आपूर्ति रोकने पर विचार कर सकते हैं। फिलहाल, हमने इंतज़ार करो और देखो की नीति अपनाई है। उत्तर भारतीयों पर हमलों की निंदा करते हुए, सोरेन ने कहा था कि भारत को ऐसे मुद्दों से सख्ती से निपटना चाहिए।
दरअसल, 2008 में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और समाजवादी पार्टी (SP) के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पों के बाद मुंबई के दादर में उत्तर-भारतीयों पर हमले शुरू हुए थे। इसकी शुरुआत तब हुई थी, जब शिवसेना से हाल ही में अलग हुई मनसे ने संयुक्त राष्ट्रीय प्रगतिशील गठबंधन (UNPA) द्वारा आयोजित एक रैली में भाग लेने जा रहे सपा के कार्यकर्ताओं पर हमला करने की कोशिश की थी।
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राज ठाकरे ने लगाया था आरोप
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने आरोप लगाया था कि उत्तर-भारतीय महाराष्ट्र की संस्कृति को खराब कर रहे है। दो पार्टियों के बीच हुए हंगामे के बाद राज ठाकरे की गिरफ्तारी की अटकलों ने रफ्तार पकड़ ली थी, और पूरे राज्य में मनसे कार्यकर्ताओं ने उत्तर-भारतीयों के खिलाफ मुहिम छेड़ दी और हिंसा, हत्या से तनाव का माहौल बन गया था।
हमलों के बाद 25 हजार से ज्यादा उत्तर-भारतीयों को महाराष्ट्र से पलायन करने की नौबत आ गई थी। इस कारण उत्तर-भारतीयों की रक्षा के लिए दिग्गजों समेत शिबू सोरेन ने भी महाराष्ट्र को चेतावनी दे दी थी। अंतत: माहौल शांत हो गया और इस हिंसा पर रोक लगी।
