फाइल फोटो (Image- Social Media)
Kathua Encounter News: जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में साल 2026 की पहली बड़ी मुठभेड़ शुरू हो चुकी है। बिलावर के कहोग जंगलों में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच तेज गोलीबारी जारी है। इस मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का एक पाकिस्तानी आतंकी गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। जम्मू-कश्मीर पुलिस और भारतीय सेना ने संयुक्त ऑपरेशन चलाते हुए आतंकियों को चारों ओर से घेर लिया है।
खुफिया इनपुट के आधार पर इलाके में कुछ संदिग्ध आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जंगलों में छिपे आतंकियों ने जवानों पर फायरिंग कर दी, जिसका सेना ने कड़ा जवाब दिया। फिलहाल दो से तीन आतंकियों के इलाके में फंसे होने की खबर है।
ऑपरेशन की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी कठुआ और एसपी ऑपरेशंस खुद मौके पर मौजूद हैं। यह इलाका घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जिसका इस्तेमाल आतंकी छिपने और घुसपैठ के लिए करते रहे हैं। सुरक्षाबलों ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर ली है और तलाशी अभियान को और तेज कर दिया गया है। किसी भी तरह की घुसपैठ को रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। इस समय पूरा कहोग बेल्ट गोलियों की आवाज से गूंज रहा है।
कठुआ एनकाउंटर की यह घटना पिछले साल की एक दर्दनाक घटना की याद भी दिलाती है। सितंबर में योगेश सिंह, दर्शन सिंह और 14 वर्षीय वरुण सिंह एक शादी समारोह में जाते समय लापता हो गए थे। परिजनों के लगातार संपर्क के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला। बाद में सेना और पुलिस ने ड्रोन की मदद से बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया और तीन दिन बाद उनके शव लोही मल्हार के पास एक जलाशय से बरामद हुए थे। इस घटना ने क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी को लेकर चिंता और बढ़ा दी थी।
आज का यह एनकाउंटर उन्हीं आतंकियों के सफाए की दिशा में एक अहम कोशिश माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां अब इन्हें किसी भी सूरत में छोड़ने के मूड में नहीं हैं। घने जंगलों में छिपे आतंकियों की पहचान जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े लोगों के रूप में हुई है, जो लंबे समय से इस इलाके में ठिकाना बनाने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस और सेना के बेहतरीन तालमेल से आतंकियों की हर चाल नाकाम हो रही है।
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घायल आतंकी के पकड़े जाने या मारे जाने से कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। स्थानीय लोगों में भी आतंकियों को लेकर गुस्सा देखा जा रहा है। जवानों की बहादुरी से अब आतंकियों की पकड़ कमजोर पड़ती नजर आ रही है। कहोग इलाका अपनी कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण हमेशा संवेदनशील रहा है। आतंकी पहाड़ी रास्तों का फायदा उठाकर सीमा पार से घुसपैठ करते हैं, लेकिन अब सुरक्षाबलों ने गश्त और कॉर्डन-एंड-सर्च ऑपरेशनों को पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा दिया है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।