RSS नेताओं से घंटों बातचीत, शंकराचार्यों का घर आना-जाना; मलिक के हलफनामे में हैरान करने वाले खुलासे
आतंक की जड़ों को सींचने वाले JKLF नेता Yasin Malik ने हाईकोर्ट में दाखिल किए हलफनामें से कई राज खोल दिए है। इतने गंभीर आरोपों के बाद भी उससे कई बड़े नेताओं की मुलाकातें होती रही थीं।
- Written By: सौरभ शर्मा
कश्मीरी अलगाववादी प्रतिबंधित JKLF नेता यासीन मलिक (फोटो- सोशल मीडिया)
Yasin Malik Affidavit Reveal Secrets: आतंकी फंडिंग मामले में तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर सनसनी मचा दी है। इस हलफनामे में उसने दावा किया है कि उसकी मुलाकातें सिर्फ राजनेताओं तक ही सीमित नहीं थीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बड़े नेताओं और शंकराचार्यों से भी उसकी बातचीत हुई थी। मलिक ने यह कदम तब उठाया है जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उसके लिए फांसी की सजा की मांग की है, जिस पर उसे जवाब दाखिल करना है।
यासीन मलिक ने 25 अगस्त को दाखिल अपने हलफनामे में कहा है कि देश के कई पूर्व प्रधानमंत्रियों, खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों और विदेशी राजनयिकों ने वर्षों तक उसके साथ संवाद किया। उसने यह भी दावा किया कि यह सोचने वाली बात है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद समाज के प्रभावशाली लोग उससे दूरी बनाने की बजाय खुलकर मिलते रहे। अब सवाल यह उठता है कि क्या मलिक इन मुलाकातों का हवाला देकर फांसी के फंदे से बचने की जमीन तैयार कर रहा है या फिर इन दावों में कोई और सच्चाई छिपी है।
RSS नेताओं से 5 घंटे बैठक, घर आए थे शंकराचार्य
हलफनामे में किया गया सबसे चौंकाने वाला दावा RSS नेताओं से मुलाकात का है। मलिक के अनुसार, साल 2011 में दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में उसकी आरएसएस नेताओं के साथ करीब पांच घंटे लंबी बैठक हुई थी, जिसे एक थिंक टैंक ने आयोजित करवाया था। इसके अलावा, उसने यह भी कहा कि दो अलग-अलग मठों के शंकराचार्य कई बार उसके श्रीनगर स्थित घर पर आए और एक बार तो उसने उनके साथ एक सार्वजनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी। इन दावों ने राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
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वाजपेयी सरकार के ‘युद्धविराम’ में निभाई थी अहम भूमिका
यासीन मलिक ने दावा किया है कि 2000-01 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा घोषित ‘रमजान युद्धविराम’ में उसकी अहम भूमिका थी। उसने कहा कि उस समय अजीत डोभाल ने उसकी मुलाकात तत्कालीन खुफिया ब्यूरो प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा से करवाई थी। मलिक का कहना है कि इसी बातचीत के बाद उसने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी सैयद सलाउद्दीन से संपर्क साधा था। उसने यह भी दावा किया कि फरवरी 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उसे औपचारिक बातचीत के लिए बुलाया था और कश्मीर मुद्दे को हल करने का आश्वासन दिया था।
