Ratan Tata : बॉस कल्चर से ऊपर उठकर काम करना टाटा की खासियत, इन योगदानों से बने महान
भारत के नामी उद्योगपति और पद्म विभूषण रतन टाटा के निधन से पुरे देश में शोक की लहर है। देश की हर बड़ी हस्ती रतन टाटा के निधन पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रही है। 28 दिसंबर 1937 को जन्मे रतन टाटा ने 9 अक्टूबर 2024 को अंतिम साँस ली है। आज उनके निधन के बाद उनके योगदान पर चर्चा की जा रही है।
- Written By: प्रतीक मिश्रा
रतन टाटा
मुंबई : भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में रतन टाटा और उनके परिवार की तूती बोलती है। टाटा समूह को भला कौन नहीं जानता है, लेकिन इतने बड़े साम्राज्य के सम्राट कई मायनो में बहुत अलग थे और उनका यही अंदाज़ उन्हें बाकियों से अलग बनाता था। देश के लिए उन्होंने कई अहम् योगदान दिए, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। बॉस कल्चर से ऊपर उठकर काम करना उनकी की खासियत रही है, जिसका कायल पूरा देश रहा है।
विदेशी कम्पनियों पर तिरंगे की छाप
रतन टाटा 1991 से लेकर 2012 तक टाटा संस के अध्यक्ष रहे, इस दौरान उन्होंने टाटा समूह का तेजी से विस्तार किया और भारत की शक्ति का लोहा पुरे विश्व में मनवाया। रतन टाटा ने अपने अध्यक्ष रहते हुए जैगुआर, लैंड रोवर, सहित टेटली जैसे विश्व स्तरीय ब्रांड्स को खरीदकर विदेशी कम्पनियो पर तिरंगे की छाप लगाने का काम किया।
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विश्व में भारतीय बाजार की धमक
दुनिया भर में भारत के बाजारों को लेकर कई तरह की बातें हुआ करती थीं और ज्यादातर संपन्न देश भारतीय बाजार को कमजोर मानते थे, लेकिन रतन टाटा ने हमेशा अपने देश के बाजारों को मजबूत करने वाले फैसले लिए। उन्होंने विश्व को बताया की भारत एक बड़ा उपभोक्ता देश है और यहाँ के लोगो में खरीदने की क्षमता काफी ज्यादा है और यही कारण रहा, जो बाद में कई बड़ी कम्पनियों ने भारत का रुख किया।
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सिर्फ कंपनी नहीं, देश को भी हो फायदा
रतन टाटा देश के एक ऐसे उद्योगपति थे, जिनके लिए सिर्फ कंपनी नहीं बल्कि देश का फायदा भी मायने रखता था। उनकी यह नीयत टाटा समूह के फैसलों में भी साफ दिखाई देती थी। उनकी कंपनी टीसीएस इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है, जो देश के कई महत्वपूर्ण सरकारी क्षेत्रों जैसे पासपोर्ट सेवा आदि में काम कर रही है।
