देश को मिलेंगे नए उपसभापति? नीतीश कुमार अब हरिवंश नारायण सिंह को नहीं भेजेंगे राज्यसभा!
Harivansh Narayan Singh: राज्यसभा में बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। उपसभापति हरिवंश नारायण का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है। जदयू उन्हें राज्यसभा भेजने के मूड में नहीं दिख रही।
- Written By: रंजन कुमार
नीतीश कुमार और हरिवंश नारायण सिंह।
NDA Rajya Sabha Election: राज्यसभा में बदलाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। इस साल राज्यसभा को नया उपसभापति मिल सकता है। इसके पीछे की वजह मौजूदा उपसभापति हरिवंश नारायण का कार्यकाल खत्म होना है। दरअसल, अप्रैल में हरिवंश का कार्यकाल समाप्त हो रहा। हरिवंश राजनीति में जाना-पहचाना चेहरा हैं। वो नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड से दो बार राज्यसभा के सांसद रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इस बार पार्टी हरिवंश की जगह नए चेहरे को राज्यसभा भेज सकती है। ऐसे में राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव होना तय माना जा रहा।
बता दें, हरिवंश नारायण 2018 से राज्यसभा के उपसभापति हैं। मगर, अब तीसरी बार उनका राज्यसभा जाना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि जदयू इस बार जातिगत और अन्य समीकरणों को देख किसी और नेता को राज्यसभा भेजना चाहती है। जदयू का यह कदम उनकी रणनीति का हिस्सा है।
बिहार में खाली होंगी 5 सीटें
अप्रैल में बिहार से राज्यसभा की 5 सीटें भी खाली होंगे। वैसे, ऐसा कहा जा रहा कि इन सीटों में से 4 सीटों पर एनडीए का जीतना तय है। इन्हीं जीती हुई सीटों में से 1 या 2 सीट जदयू के खाते में जाएंगी। ऐसे में समीकरण और रणनीति की बात की जाए तो जदयू के वरिष्ठ नेता सह केंद्रीय मंत्री और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर को फिर सीट मिलना तय माना जा रहा है। साथ ही वे मोदी सरकार में मंत्री भी बने रहेंगे। जदयू अपने दूसरे सांसद हरिवंश नारायण सिंह को तीसरी बार राज्यसभा नहीं भेजने के पक्ष में दिख रहा है, क्योंकि उन्हें राज्यसभा के दो कार्यकाल मिल चुका है।
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कैसे रहें नीतीश और हरिवंश के रिश्ते?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और हरिवंश नारायण सिंह के रिश्ते को लेकर कई बातें सामने आई हैं। पहले हरिवंश नारायण सिंह को नीतीश कुमार का काफी करीबी माना जाता है था। 2018 में बीजेपी ने हरिवंश को उपसभापति बनाने का प्रपोजल दिया था, तब नीतीश ने उन्हें सपोर्ट किया था। बाद में दोनों के रिश्ते में खटास आई, जब 2022 में नीतीश ने एनडीए का साथ छोड़ महागठबंधन का दामन थामा और नई सरकार बनाई। तब हरिवंश नारायण ने अपने पद से इस्तीफा देने से मना कर दिया था।
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जदयू क्या कह रही?
जब विवाद सामने आया था तो हरिवंश नारायण सिंह ने तर्क दिया था कि वे एक संवैधानिक पद पर हैं, इसलिए इस्तीफा देना ठीक नहीं है। इसके लिए जदयू नेताओं ने उन्हें खूब घेरा भी था। फिलहाल उपसभापति पद को लेकर जदयू नेताओं का साफ कहना है कि यह काम बीजेपी का है, वही तय करेगी कि कौन होगा उपसभापति।
