Jagannath Temple Puri: भगवान जगन्नाथ को क्यों चढ़ाया जाता है 'बेंत'? जानिए मां यशोदा से जुड़ा भावुक किस्सा

Jagannath Temple: Jagannath Temple Puri: भगवान जगन्नाथ को बेंत चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसके पीछे कई अद्भुत कहानियां छिपी हैं। आइए जानते हैं बेंत से जुड़ी मान्यताओं के बारे में।
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प्रभु जगन्नाथ (फोटो. सोशल मीडिया)
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Jagannath Temple Truth: जगन्नाथ पुरी धाम की कई अनोखी परंपराएं हैं, जो उनके भक्तों को हर बार अचंभित कर देती है। इन्हीं अनोखी परंपराओं में से एक है 'बेंत प्रसाद'। 16 जुलाई को ओड़िशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विशाल यात्रा निकलेगी, जिसे देखने देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी में एकत्रित होते हैं। इस मौके पर भगवान जगन्नाथ की एक झलक पाने के लिए भक्तों की श्रद्धा और समर्पण देखते ही बनती है।

क्या है बेंत से जुड़ी परंपरा के असल मायने

इस अनूठी परंपरा में झुकी हुई छड़ियों का अर्पण और उपयोग किया जाता है। जिन्हें स्थानीय रूप से बेथ या बेंटा कहा जाता है। बेथ की छड़ी पारंपरिक रूप से बांस या बेंत से बनाई जाती है और भगवान जगन्नाथ को एक प्रतीकात्मक संकेत के रूप में अर्पित की जाती है। मंदिर की परंपराओं के अनुसार, यह छड़ी अधिकार, सुरक्षा और भक्तों के मार्गदर्शन की जिम्मेदारी का प्रतीक है। यह प्रभु जगन्नाथ की राजा और ब्रह्मांड के रक्षक के रूप में भूमिका को भी दर्शाती है।

जगन्नाथ रथ यात्रा(फोटो. सोशल मीडिया)

अनुशासन का प्रतीक

बेंत की छड़ी पवित्र जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान सहारा देने का भी प्रतीक है और इसे अनुशासन और न्यायपूर्ण शासन का प्रतीक माना जाता है। यह भक्तों को याद दिलाता है कि भगवान न केवल करुणा बरसाते हैं बल्कि धर्म और न्याय का भी पालन करते हैं।

जब यशोदा मां ने लगाई डांट

इसके अलावा बेंत से जुड़ी अन्य मान्यता यह है कि भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल में मां यशोदा उन्हें शरारत करने पर बेंत से डांटती और कभी-कभी मारती भी थीं। इसी कथा से जुड़ी यह परंपरा आज भी जगन्नाथ मंदिर में निभाई जाती है। भगवान श्रीकृष्ण बचपन में बहुत नटखट थे। मां यशोदा उनकी अठखेलियों से परेशान होकर उनको डांट लगाती थी और कभी-कभी बेंत से मारती भी थी। इसी बेंत को खाते-खाते भगवान श्रीकृष्ण एक ग्वाले से द्वारकाधीश बन गए। यह बेंत भगवान श्रीकृष्ण को अति प्रिय है।

बेंत के स्पर्श मात्र से होता है पापों का नाश

मंदिर में भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा के पास रखे विशेष नारियल की लकड़ी से बने बेंत का स्पर्श श्रद्धालुओं को कराया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस बेंत का स्पर्श मिलने से पापों का नाश होता है, जीवन में सकारात्मकता आती है और व्यक्ति को सही मार्ग की प्राप्ति होती है।

जगन्नाथ मंदिर (फोटो. एआई)

श्रद्धालु प्रसाद के रूप में ले जाते हैं बेंट

इतना ही नहीं, जगन्नाथ पुरी से कई श्रद्धालु इस बेंत को प्रसाद के रूप में अपने घर भी लेकर आते हैं। मान्यता है कि इसे घर के मंदिर में स्थापित कर नियमित पूजा के बाद परिवार के सदस्यों को स्पर्श कराने से नकारात्मक ऊर्जा क्षीण होती है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

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