दिल्ली-बेंगलुरु जल संकट (सोशल मीडिया)
दिल्ली: उत्तर भारत प्रचंड गर्मी की चपेट मे है। वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जलसंकट चरम पर है। बढ़ती गर्मी के बीच पानी की मांग कई गुना तक बढ़ गई है। मानसून समय से ना आने की वजह से पानी का स्तर कम होता जा रहा है। हालांकि की इस समस्या का कारण ना केवल मौसम बल्कि पड़ोसी राज्य हरियाणा भी माना जाता रहा है। यह समस्या आज से नहीं बल्कि 30 साल पुरानी है।
यमुना नदी दिल्ली समेत हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में भी पानी का महत्वपूर्ण स्रोत है। इन सभी राज्यों से होकर गुजरने वाली यमुना नदी को लेकर सब की अपनी मांगे है। जिसकी वजह यह समस्या अक्सर आती रहती है। इस समस्या के समाधान के लिए 1994 में ऊपरी यमुना नदी बोर्ड (यूवाईआरबी) का गठन किया गया था। 1996 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में दिल्ली को अतिरिक्त पानी का हकदार बताया गया था।
साथ ही कोर्ट की तरफ से हरियाणा को यह आदेश दिया गया कि पूरे साल दिल्ली को विशिष्ट मात्रा में पानी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। जिसके लिए हरियाणा को वज़ीराबाद और हैदरपुर जलाशयों को भरे रहने का आदेश दिया गया। मौजूदा नहर प्रणाली के मुताबिक रिसाव को बंद करके दिल्ली की जरुरतों को पूरा करने के लिए दोनों राज्यों के बीच 102 किलोमीटर लंबे जलसेतु का निर्माण किया गया। जो कि खुबरू और मंडोरा बैराज के रास्ते दिल्ली के हैदरपुर में खत्म होती है।
इसी समझौते के मुताबिक 2003 से 2012 के बीच हरियाणा सरकार द्वारा मुनक नहर का निर्माण किया गया। हालांकि दिल्ली की ओर से भी लगभग 450 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई। विवाद तब शुरु हुआ जब मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने हरियाणा में जल संकट की घोषणा करते हुए मुनक नहर के माध्यम से बचाए गए पानी को दिल्ली भेजने से मना कर दिया।
वहीं दिल्ली का दावा था कि हमने भी इसमें अपना योगदान दिया है। इसलिए हमें भी पानी मिलनी चाहिए। इसके बाद केंद्र सरकार की मदद से समस्या को सुलझाने की कोशिश की गई , फिर भी सफलता हाथ नहीं लगी। जिसके बाद 2018 में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिसपर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूरे तालाब को भरे रखने का आदेश दिया गया। हालांकि 2021 में फिर से दिल्ली की ओर से कहा गया कि 120 मिलियन गैलन प्रति दिन (एमजीडी) पानी रोका जा रहा है। जिसकी वजह से दिक्कतें आ रही है।
दिल्ली की बढ़ती समस्या को देखते हुए इस साल कोर्ट की ओर से पड़ोसी राज्यों को दिल्ली को पानी उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया। जिस पर हिमाचल प्रदेश ने साथ देने की बात कही थी। बाद में हिमाचल ने भी पानी की कमी का हवाला देते हुए अपना वादा वापस ले लिया। जिसकी वजह से दिल्ली के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। अगर इन दोनों राज्यों के बीच समझौत नहीं होता है तो दिल्ली में पानी की समस्या और भी बढ़ सकती है।
बेंगलुरु में भी हर रोज 500 मिलीयन लीटर पानी की कमी हो रही है। यहां बारिश ही पानी की समस्या का मुख्य कारण है। यह भी सच है कि बंगलुरु के अलावा भी बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में भी बारिश औसत से कम हुई है, लेकिन इन सभी जगहों और बेंगलुरु के जमीन में काफी अंतर है। बाकि सारे राज्यो की जमीन काफी लेट से भरती (अंडरग्राउंड वॉटर) है लेकिन काफी दिन तक रहती है। वहीं बेंगलुरु तुरंत भर जाता है और तुरंत खत्म भी हो जाता है। जिसकी वजह से यहां परेशानी होती रहती है।