खेती करता किसान। इमेज-एआई 
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गजब कर दी मोदी सरकार... 53 प्रमुख योजनाओं पर बजट का आधा हिस्सा भी नहीं कर सकी खर्च

Modi Government Scheme : केंद्र सरकार द्वारा 6 प्रमुख योजनाओं पर बजट अनुमान से 40 फीसदी से भी कम की राशि खर्च की गई है। वहीं, छह अन्य योजनाओं को बजट के 10 फीसद से भी कम राशि आवंटित हुई।

रंजन कुमार

Modi Government News : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और उनके बजट आवंटन को लेकर एक चौंकाने वाला डेटा सामने आया है। चालू वित्त वर्ष की तीन तिमाहियां बीतने के बाद भी सरकार 53 प्रमुख योजनाओं पर बजट का आधा हिस्सा भी खर्च नहीं कर पाई है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 31 दिसंबर तक इन योजनाओं के लिए आवंटित कुल राशि का मात्र 41.2 प्रतिशत ही जारी किया जा सका है।

वित्त वर्ष 2025-26 के शुरुआती बजट अनुमान में इन 53 योजनाओं के लिए 5 लाख करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया था। वैसे, खर्च की धीमी गति को देखते हुए सरकार ने संशोधित अनुमान में इसे घटाकर 3.8 लाख करोड़ रुपये कर दिया। यह कटौती दर्शाती है कि कई विभाग आवंटित राशि का उपयोग करने में विफल रहे हैं। स्थिति यह है कि 47 योजनाओं के फंड में सरकार ने भारी कटौती की है।

सिंचाई और शहरी विकास योजनाओं को लगा झटका

सबसे बुरा असर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना पर पड़ा है, जहां 850 करोड़ रुपये के बजट को घटाकर मात्र 150 करोड़ रुपये कर दिया गया। इसके अलावा जल जीवन मिशन, पीएम ई-बस सेवा और पीएमएवाई (शहरी) जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को अब तक उनके कुल बजट का 10 प्रतिशत फंड भी नसीब नहीं हुआ है। यह डेटा उन दावों पर सवाल उठाता है, जिनमें विकास कार्यों में तेजी की बात कही जाती है।

मनरेगा को मिला सहारा, पेंशन योजनाओं पर भरोसा

जहां एक तरफ कई योजनाओं के बजट काटे गए, वहीं मनरेगा, अनुसूचित जनजाति छात्रवृत्ति और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन जैसी 3 योजनाओं के बजट में बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा विधवा पेंशन और स्वास्थ्य ढांचे से जुड़ी योजनाओं के बजट को यथावत रखा गया है।

अंतिम तिमाही पर टिकी उम्मीदें

आंकड़ों के अनुसार 12 योजनाओं पर ही 75 से 90 प्रतिशत खर्च हो पाया है। सरकार को अब उम्मीद है कि वित्त वर्ष के अंतिम तीन महीनों में खर्च में तेजी आएगी और कुल व्यय 75 प्रतिशत के पार पहुंच जाएगा। वैसे, जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि को महज तीन महीनों में प्रभावी ढंग से खर्च करना बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी।

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