ऑपरेशन सिंदूर पर सबसे बड़ा खुलासा…S-400 ने पाकिस्तान को धकेल दिया था बैकफुट पर, चीन से लेकर यूरोप तक चौंका
S-400 Air Defence: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एयर फोर्स ने जंगली इलाके में S-400 को तैनात किया था। चीनी और यूरोपीय सैटेलाइट इसको हाईवे किनारे खोज रहे थे। S-400 फायर के बाद तुरंत जगह बदलता था।
- Written By: रंजन कुमार
एस-400 एयर, जिसने ऑपरेशन सिंदूर में अहम योगदान दिया।
Operation Sindoor: मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ हुए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत द्वारा इस्तेमाल किए गए रशियन S-400 ट्रायंप एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम ने पाकिस्तान को फ्रंटफुट से बैकफुट पर धकेल दिया था। S-400 ने न सिर्फ फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया, बल्कि पाकिस्तानी वायु सेना के चीन के सैटेलाइट और यूरोप के सैटेलाइट को मात दे दी।
आईडीआरडब्ल्यू के मुताबिक S-400 की फायरिंग यूनिट्स को शूट एंड स्कूट रणनीति पर चलाया गया था। इसका मतलब है कि मिसाइल दागो और तुरंत जगह बदल दो। ये यूनिट्स ऑफ रोड इलाकों, जंगलों और दूर-दराज के क्षेत्रों में लगातार मूव करती रहीं, जहां दुश्मन ने कभी भारी एयर डिफेंस सिस्टम की मौजूदगी की कल्पना नहीं की थी। यही तेजी और अनिश्चितता S-400 की ऊंची इंटरसेप्शन सफलता का बड़ा कारण बनी है।
S-400 ने गिराए पाकिस्तान के फाइटर जेट
भारतीय वायु सेना के प्लानरों ने जानबूझकर सामान्य सड़कों और अनुमानित डिप्लॉयमेंट जोन्स से दूरी बना ली। इसके बजाय लॉन्चरों को खुले मैदानों, जंगलों के रास्तों और अस्थायी ट्रैक्स से क्रॉस-कंट्री मूव किया। इससे पाकिस्तानी इंटेलिजेंस के लिए कोई भरोसेमंद ट्रैकिंग मॉडल बनाना लगभग असंभव हो गया। कई बार फायरिंग यूनिट्स को घने जंगलों और फॉरवर्ड इलाकों में छिपाया गया, जहां सैटेलाइट फोकस नहीं था। सूत्रों के मुताबिक हर एक एंगेजमेंट के बाद S-400 लॉन्चर तुरंत जगह बदल लेते थे। कई मामलों में एक फायरिंग के बाद 50-100 किलोमीटर तक मूवमेंट की गई। मिसाइल लॉन्च होते यूनिट्स पैकअप कर देती थीं, जिससे दुश्मन फायरिंग लोकेशन फिक्स न कर पाए।
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पाक सेना रात भर खोजती रही एयर डिफेंस
इस रणनीति की बड़ी ताकत S-400 का डिस्ट्रिब्यूटेड एंगेजमेंट आर्किटेक्चर थी। इसमें मिसाइल गाइडेंस के लिए लॉन्चर का रडार के साथ एक जगह रहना जरूरी नहीं होता है। टारगेट डेटा और मिड कोर्स गाइडेंस नेटवर्क में मौजूद दूसरे S-400 रडारों से मिलता रहा। इससे लॉन्चर मिसाइल के उड़ान में रहते हुए जगह बदल सकता था। इस शूटर सेंसर सेपरेशन ने ऐसा बदलता हुआ एंगेजमेंट पैटर्न बनाया, जिसे पाकिस्तानी वायु सेना कभी मैप ही नहीं कर सकी।
सैटेलाइट भी हुए फेल
सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने मिसाइल लॉन्च डिटेक्शन और ट्रैजेक्टरी एनालिसिस के माध्यम से S-400 की लोकेशन ट्रायएंगुलेट करने की कई प्रयास किए। इसके लिए चीनी सैन्य सैटेलाइट और यूरोपीय कमर्शियल सैटेलाइट कंपनियों को लगाया गया, मगर ये कोशिशें गलत मान्यताओं और पुराने डेटा के चलते फेल होती रहीं। पाकिस्तानी प्लानर बार-बार मानते रहे कि S-400 यूनिट्स सड़कों के पास होंगी, जबकि असलियत में ये लॉन्चर मुख्य रास्तों से बहुत दूर ऑपरेट कर रहे थे। ये सैटेलाइट री-टास्किंग से पहले जगह बदल चुके होते थे।
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स्वदेशी एयर डिफेंस ने मारे फाइटर जेट
कई बार पाकिस्तानी वायु सेना के स्ट्राइक पैकेज संदिग्ध S-400 लोकेशनों की तरफ भेजे गए, लेकिन जब विमान वहां पहुंचे तो लॉन्चर निकल चुके थे। वहां सिर्फ डिकॉय सिग्नेचर और खाली फायरिंग पोजिशन बची थीं। भारतीय वायु सेना की लेयर्ड एयर डिफेंस नेटवर्क ने पाकिस्तान की मुश्किल और बढ़ा दी थी। S-400 अकेला नहीं था। MRSAM जैसे मीडियम रेंज सिस्टम और अन्य रडार एकीकृत नेटवर्क में जुड़े थे, जिससे टारगेट हैंड ऑफ और साझा सिचुएशनल अवेयरनेस बनी रही। वायु सेना प्रमुख सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि S-400 ने पाकिस्तान के 4 से 5 फाइटर जेट गिराए।
