IMI नेगेव एनजी
नई दिल्ली: भारत ने स्वदेशी हथियार उत्पादन के क्षेत्र में एक अहम कदम उठाया है। देहरादून स्थित BSS मटेरियल कंपनी ने अपनी नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऑटोनॉमस लीथल वेपन सिस्टम, नेगेव LMG का 14000 फीट की ऊंचाई पर सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया है। भारतीय सेना के साथ मिलकर यह परीक्षण किया गया था। यह टेक्नोलॉजी भविष्य के वॉर, विशेषकर बॉर्डर एरिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जहां जवानों को उतारना जोखिम भरा होता है, वहां यह हथियार आसानी से काम कर सकता है।
इस तरह के हथियारों का परीक्षण ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को मजबूत करने के लिए किए जा रहे हैं। यह तकनीक भारतीय डिफेंड टेक्नोलॉजी में एक नया इतिहास रचता है। आर्टिफिशियल -इनेबल्ड हथियारों से हमारी सेना को ज्यादा मजबूती मिलेगी। सीमा पर सुरक्षा बढ़ेगी।
बता दें कि यह तकनीक दुनिया की खतरनाक मशीन गन में से एक है। इस गन की कुल वजन 7.65 किलोग्राम की है। इस गन मे 5.56x45mm नाटो मैगजीन लगती है। यह गैस ऑपरेटेड रोटेटिंग बोल्ट तकनीक पर काम करती है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह गन एक बार में 850 से 1050 राउंड प्रति मिनट की रेट से फायरिंग कर सकती है। इसके अलावा सबसे खास बात यह है कि गोलियां 915 मीटर प्रति सेकेंड की गति से दुश्मन की धज्जियां उड़ा सकती है। इस मशीन गन की फायरिंग रेंज 300 से 1000 मीटर होती है। अधिकतम 1200 मीटर तक फायर कर सकती है। इसमें 150 से 200 राउंड की बेल्ट या 35 राउंड की मैगजीन लगाई जा सकती है।
स्थान: 14,000 फीट की ऊंचाई पर कठिन सीमाई इलाकों में।
उद्देश्य: हथियार की कार्यक्षमता और सटीकता का आकलन करना।
तकनीक: इस हथियार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लगा है, जो दुश्मनों को पहचान सकता है। खुद से फायर कर सकता है।
सहयोग: भारतीय सेना और देहरादून की BSS मटेरियल कंपनी ने मिलकर यह परीक्षण किया।
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए बहुत बड़ा कदम उठाया है। डीआरडीओ ने 9 अलग-अलग तकनीकों को 10 सार्वजनिक और निजी कंपनियों को सौंपा है। इन तकनीकों में हथियार और जमीनी युद्ध में इस्तेमाल होने वाले सिस्टम शामिल हैं। इनमें माउंटेड आर्टिलरी गन और सीबीआरएन (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर) रिकॉनेसेंस व्हीकल जैसे सिस्टम भी हैं। शनिवार को महाराष्ट्र के अहमदनगर के पास व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (VRDE) में एक कार्यक्रम में यह समझौता हुआ। डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी कामत ने इस मौके पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वदेशी आकाश मिसाइलों के शानदार प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा इंडस्ट्री को ऐसे हालात के लिए जल्द और बेहतर क्षमता वाली योजना तैयार करनी चाहिए।