तमिलनाडु में स्टालिन का किला ढहा…कोलाथुर सीट से मिली करारी हार, पुराने साथी ने ही दी पटखनी
Tamil Nadu Election 2026: तमिलनाडु चुनाव 2026 में बड़ा उलटफेर हो गया। एमके स्टालिन अपने गढ़ कोलाथुर से चुनाव हार गए हैं। थलपति विजय की पार्टी TVK के वीएस बाबू ने दिग्गज नेता को करारी शिकस्त दी।
- Written By: अक्षय साहू
तमिलनाडु में कोलाथुर सीट चुनाव हारे एमके स्टालिन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Tamil Nadu MK Stalin Lost Election: तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने शुरू हो गए हैं, इसके साथ ही इस चुनाव के सबसे बड़े उल्टफेर भी हो गया है। तमिलनाडु के मौजूदा मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) प्रमुख एमके स्टालिन कोलाथुर सीट से चुनाव हार गए हैं। कोलाथुर सीट को DMK का अभेद्य किला माना जाता था लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में यह किला ढह गया है।
इससे पहले स्टालिन कोलाथुर सीट से लगातार तीन बार (2011, 2016, 2021) जीत चुके हैं। स्टालिन को थलापति विजय की नई नवेली पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के उम्मीदवार वीएस बाबू ने पटखनी दी है। वीएस बाबू स्टालिन के पुरानी साथी रहे हैं। इससे पहले 2021 विधानसभा चुनाव के दौरान स्टालिन एमके स्टालिन ने AIADMK के आदि राजाराम को हराकर अपनी जीत हैट्रिक पूरी की थी।
DMK के विधायक थे वीएस बाबू
वीएस बाबू इससे पहले द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का ही हिस्सा था। वो DMK से विधायक भी रह चुके हैं। इसके अलावा 2011 के विधानसभा चुनाव के दौरान वो कोलाथुर सीटे से एमके स्टालिन के चुनाव के इंचार्ज भी थे लेकिन बाद में उन्होंने मनमुटाव के बाद DMK का साथ छोड़कर AIADMK में शामिल हो गए थे। इसके बाद जब विजय ने अपनी राजनीति पार्टी बनाने का ऐलान किया तो वो 7 फरवरी 2026 को TVK में शामिल हो गए थे।
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तमिलनाडु की राजनीति में एमके स्टालिन का नाम दिग्गज नेताओं में लिया जाता है। वो पांच बार के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के बेटे हैं। करुणानिधि राजनीति में आने से पहले फिल्में लिखा करते थे। 2018 में करुणानिधि के निधन के बाद स्टालिन ने DMK की कमान अपने हाथ में ली थी और पार्टी के अध्यक्ष बने थे।
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2011 से कोलाथुर से जीतते आ रहे थे स्टालिन
कोलाथुर सीट को स्टालिन का किला माना जाता था। 2011 में इस सीट को विल्लिवक्कम का कुछ भाग और पुरासावक्कम विधानसभा को मिलाकर बनाया गया था। जब से कोलाथुर विधानसभा सीट बनी थी तब से स्टालिन यहां के विधायक रहे थे। स्टालिन को इस सीट से अपनी जीत का इतनी भरोसा था कि उन्होंने किसी और सीट चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था। अब देखने यह होगा की इस करारी हार के बाद एमके स्टालिन क्या करते हैं।
