वो BJP नेता जिसकी वाकपटुता के सामने कांग्रेस की बोलती हो जाती थी बंद, पद नहीं लोगों के लिए किया काम
Sushma Swaraj Birthday: सुषमा स्वराज, भारत की पहली महिला विदेश मंत्री और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री, अपनी प्रभावशाली वाकपटुता, कुशल नेतृत्व और समर्पित सार्वजनिक सेवा के लिए याद की जाती हैं।
- Written By: अक्षय साहू
सुषमा स्वराज (सोर्स- सोशल मीडिया)
Sushma Swaraj Birth Anniversary: 1990 का दशक भारत की राजनीति में बड़े बदलाव का समय था। कांग्रेस का प्रभाव घट रहा था और भारतीय जनता पार्टी (BJP) तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर उभर रही थी। इसी समय एक महिला नेता ने अपनी दमदार वाकपटुता और प्रभावशाली नेतृत्व क्षमता से सबका ध्यान आकर्षित किया- वे थीं सुषमा स्वराज।
सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला छावनी में हुआ था। उनके पिता हरदेव शर्मा और माता लक्ष्मी देवी थीं। उनके पिता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय सदस्य थे, जिससे सुषमा में बचपन से ही सामाजिक और राजनीतिक चेतना विकसित हुई। उन्होंने अंबाला के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत और राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और वहीं अपने अद्भुत वाक कौशल का प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से कानून की पढ़ाई की और विश्वविद्यालय में सर्वोच्च वक्ता का सम्मान हासिल किया।
52 दिन के लिए संभाली दिल्ली की कमान
सुषमा स्वराज दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं और उन्होंने 13 अक्टूबर 1998 से 3 दिसंबर 1998 तक इस पद का निर्वहन किया, जो कुल 52 दिनों का रहा। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता के रूप में उन्होंने साहिब सिंह वर्मा के बाद सत्ता संभाली थी। हालांकि, उस समय बढ़ती महंगाई, विशेषकर प्याज की कीमतों में उछाल, उनके कार्यकाल को संक्षिप्त बनाने का कारण बनी।
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सुप्रीम कोर्ट में की वकालत
सुषमा स्वराज सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में कार्य कर चुकी थीं, लेकिन उनका राजनीतिक करियर और भी प्रभावशाली रहा। 1970 के दशक में उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर आपातकाल के दौरान कांग्रेस विरोधी आंदोलन में भाग लिया। 1977 में मात्र 25 वर्ष की उम्र में वे अंबाला से हरियाणा विधानसभा की सदस्य बनीं और चौधरी देवी लाल की सरकार में सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनीं।
राष्ट्रीय राजनीति में बनाई अपनी अलग पहचान
भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। 1990 में वे राज्यसभा की सदस्य बनीं और 1996 में दक्षिण दिल्ली से लोकसभा चुनाव जीतकर सूचना एवं प्रसारण मंत्री रहीं। उनके ओजस्वी भाषण और तार्किक विचार उन्हें संसद और जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बनाते थे। वे हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी और कन्नड़ जैसी कई भाषाओं में प्रवाहपूर्ण भाषण देती थीं। उनके भाषण हमेशा सुविचारित और स्पष्ट होते थे, चाहे वह संसद का कोई मुद्दा हो या अंतरराष्ट्रीय मंच।
भारत की पहली महिला विदेश मंत्री
2006 में वे फिर राज्यसभा की सदस्य बनीं और 2009 में लोकसभा पहुंचकर वहां विपक्ष की नेता बनीं। 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार में विदेश मंत्री बनीं और भारत की पहली महिला विदेश मंत्री बनने का गौरव हासिल किया। उनके नाम कई रिकॉर्ड हैं- भाजपा की पहली महिला प्रवक्ता, पहली महिला केंद्रीय मंत्री और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री।
सुषमा स्वराज न केवल एक प्रभावशाली वक्ता थीं, बल्कि एक कुशल प्रशासक और दूरदर्शी नेता भी थीं। उन्होंने विदेश नीति, कूटनीति और नागरिक सेवा में अपनी विशिष्ट छवि बनाई। स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने 2019 का चुनाव नहीं लड़ा, और 6 अगस्त 2019 को उनका निधन हो गया।
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आज भी उनका व्यक्तित्व, उनकी भाषण कला और उनकी देशभक्ति लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। सुषमा स्वराज ने यह दिखाया कि नेतृत्व केवल पद और शक्ति से नहीं, बल्कि वाकपटुता, विवेक और समर्पण से होता है। उनका जीवन और करियर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श उदाहरण बना हुआ है।
