धर्म बदलते ही खत्म हो जाएगा अनुसूचित जाति का दर्जा, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
Supreme Court Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करता है, तो उसका अनुसूचित जाति का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाएगा।
- Written By: अर्पित शुक्ला
सुप्रीम कोर्ट (सोर्स- आईएएनएस)
Supreme Court On Religion Conversion: अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है।
मंगलवार को जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। मुख्य सवाल यह था कि क्या हिंदू धर्म से ईसाई धर्म अपनाने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति के दर्जे का दावा कर सकता है।
हाई कोर्ट के फैसले को रखा बरकरार
अदालत ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि जो व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, वह अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं माना जा सकता। यानी किसी अन्य धर्म को अपनाने पर SC का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है।
सम्बंधित ख़बरें
कॉकरोच कहने वाले से नहीं चाहिए डिग्री…CJI सूर्यकांत को हैदराबाद की यूनिवर्सिटी में बुलाने पर भड़के छात्र
Air India Flight टर्बुलेंस मामले में बड़ा खुलासा, पायलट का डोप टेस्ट पॉजिटिव? जानें क्या लिया एक्शन
15 अगस्त से पहले भारत-पाक सीमा पर टेंशन, BSF ने घुसपैठ की कोशिश में संदिग्ध को किया ढेर, पहचान बनी मिस्ट्री!
आज की ताजा खबर 09 अगस्त: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हुआ हमला
ईसाई बनने पर SC/ST का दर्जा खत्म होगा
सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में कहा है कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में कन्वर्ट होता है, उसे अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं माना जा सकता और वह SC/ST अधिनियम, 1989 के तहत किसी भी संरक्षण का दावा नहीं कर सकता। यह फैसला जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस ए वी अंजारिया की बेंच ने सुनाया। बेंच ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि जो व्यक्ति ईसाई धर्म अपना चुका है और उसका सक्रिय रूप से पालन करता है, वह अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं रह सकता।
धर्म परिवर्तन पर अनुसूचित जाति का दर्जा खत्म
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, वह अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। किसी अन्य धर्म में परिवर्तन करने से SC का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है।
यह भी पढ़ें- Bengal Election 2026: आधी रात को आया निर्वाचन आयोग का बड़ा फैसला, 29 लाख लोगों की खुली किस्मत
SC/ST अत्याचार अधिनियम के तहत संरक्षण नहीं मिलेगा
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट हुआ कि अपीलकर्ता लगभग एक दशक तक ईसाई धर्म का पालन करता रहा और पादरी के रूप में रविवार की प्रार्थनाएं भी कराता रहा। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य मानकर SC/ST अत्याचार अधिनियम के तहत संरक्षण देना उचित नहीं होगा।
