

Central Secretariat Library Shifting: देश की शीर्ष अदालत ने दिल्ली में 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी को शिफ्ट करने के प्लान पर स्वत: संज्ञान लिया है। इस लाइब्रेरी में 8.5 लाख से ज्यादा किताबें हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब चिंता जताई जा रही है कि नई सेंट्रल विस्टा योजना में लाइब्रेरी के लिए कोई जगह नहीं रखी गई है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच सोमवार को इस मामले की सुनवाई करेगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाउसिंग और अर्बन अफेयर्स मिनिस्ट्री और सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट नई सेंट्रल विस्टा योजना के तहत इसे दूसरी जगह ले जाने के लिए अभी भी जगह तलाश रहे हैं। लेकिन भारत सरकार के अलग-अलग विभागों के बीच इसको लेकर सहमति नहीं बन पाई है।
सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी भारत सरकार की सबसे पुरानी लाइब्रेरी में से एक है और यह संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत आती है। इसकी शुरुआत 1891 में हुई थी, जब कोलकाता में इंपीरियल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी की स्थापना की गई थी। राजधानी बदलने के साथ ही इस लाइब्रेरी को भी दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया और 1969 से यह शास्त्री भवन के G-विंग में स्थित है। इसमें साढ़े 8.5 लाख से ज्यादा दुर्लभ किताबें, पांडुलिपियां, पुराने सरकारी दस्तावेज और ऐतिहासिक रिकॉर्ड हैं।
लाइब्रेरी में किताबों के कलेक्शन के आकार की बात करे तो 8.5 लाख बुक है। यह नेशनल लाइब्रेरी, कोलकाता के बाद केंद्र सरकार की दूसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी है। CSL की एक टेक्स्ट बुक लाइब्रेरी नई दिल्ली के आर.के. पुरम में भी स्थित है। इस लाइब्रेरी में जुड़ने के लिए सदस्यता फॉर्म भरना पड़ता है। जिसमें अलग-अलग कैटेगरी के लिए फॉर्म भरा जाता है।
लाइब्रेरी में कलेक्शन डेवलपमेंट का मुख्य मकसद उन एकेडमिक लोगों को सेवाएं देना है जो भारत और भारतीय राज्यों के सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक विकास से जुड़ी पढ़ाई-लिखाई में लगे हैं। इसलिए, कलेक्शन डेवलपमेंट का फोकस डेवलपमेंट से जुड़े साहित्य का एक रिसोर्स सेंटर बनाना है।
सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के लिए अभी तक कोई जगह अलॉट नहीं किया गया है। CSL के नए ठिकाने को लेकर केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2026 में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन आने वाले संपदा निदेशालय ने CSL के लिए कर्तव्य भवन-2 के ग्राउंड फ्लोर पर करीब 300 वर्ग मीटर में दो कमरे आवंटित किए थे, लेकिन संस्कृति मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि उपलब्ध जगह लाइब्रेरी के विशाल संग्रह और आवश्यक सुविधाओं के लिए पर्याप्त नहीं है।