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‘हाई कोर्ट में अर्जी पेंडिंग, फिर भी अपील’, बंगाल के किस मामले पर भड़का सुप्रीम कोर्ट?

Misuse of Article 32: सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 32 के दुरुपयोग पर नाराजगी जताई, कहा कि हर छोटी बात पर याचिका दायर करना कानून का घोर दुरुपयोग है।

  • By अर्पित शुक्ला
Updated On: Jan 17, 2026 | 07:15 AM

सुप्रीम कोर्ट, (सोर्स- सोशल मीडिया)

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Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिकाएं दाखिल करने में हो रहे दुरुपयोग पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में कोई भी व्यक्ति सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है। बॉम्बे सिविल कोर्ट में सुनवाई टलने के बाद एक व्यक्ति द्वारा इसी अधिकार के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किए जाने पर जस्टिस बी. वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने उसे कड़ी फटकार लगाई।

कोर्ट ने कहा कि हर छोटी-छोटी बात पर, यहां तक कि स्थगन के मामलों में भी, अनुच्छेद 32 के तहत याचिकाएं दाखिल कर दी जाती हैं। खास तौर पर दिल्ली और आसपास के इलाकों से ऐसी याचिकाएं अधिक आ रही हैं। यह क्या तरीका है? अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया और कानून का गंभीर दुरुपयोग बताते हुए याचिका खारिज कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की, “हर छोटी बात पर, स्थगन पर भी, यहां आर्टिकल 32 के तहत याचिका दाखिल की जाती है। यह कानून का खुला दुरुपयोग है।”

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तृणमूल नेता मुकुल रॉय को अयोग्यता से राहत

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के उस हालिया आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय को दलबदल विरोधी कानून के तहत पश्चिम बंगाल विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दिया गया था।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांशु रॉय द्वारा हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी और भाजपा विधायक अंबिका रॉय समेत अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने उन्हें चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। तब तक विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर रोक रहेगी।

यह भी पढ़ें- ‘जब हम काबा नहीं जाते, तो तुम्हारा यहां क्या काम है,’ धीरेंद्र शास्त्री ने किसे बताया ‘सेकुलरिज्म का कीड़ा’?

मुकुल रॉय के मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डिजिटल सबूतों को विधिवत तरीके से साबित करना जरूरी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा तकनीकी दौर में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की प्रामाणिकता को केवल अनुमान के आधार पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

Supreme court strict stance on misuse of article 32 reprimand for filing direct sc petition while high court plea pending

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Published On: Jan 17, 2026 | 07:15 AM

Topics:  

  • Supreme Court
  • TMC
  • West Bengal

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