आवारा पशु से एक्सीडेंट हुआ तो अब सरकार को देना होगा मोटा मुआवजा! सुप्रीम कोर्ट का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला
Supreme Court Cattle Verdict: सड़कों पर आवारा पशुओं से एक्सीडेंट होने पर अब सरकार को देना होगा मुआवजा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को कंपनसेशन नियम बनाने का ऐतिहासिक निर्देश दिया।
- Written By: अनन्या तिवारी
सांकेतिक फोटो (सोर्स-AI)
Supreme Court Directs Mandatory Government Compensation For Stray Animal Accidents: सड़कों पर घूमते मवेशी अब केवल ट्रैफिक जाम का कारण नहीं बल्कि जानलेवा साबित हो रहे हैं। आए दिन होने वाले इन हादसों पर लगाम लगाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि आवारा पशुओं के कारण कोई दुर्घटना होती है तो उसके लिए केंद्र और राज्य सरकार से मुआवजा मिलना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त फैसला
मुआवजा अब हक है, व्यवस्था नहीं अक्सर देखा जाता है कि आवारा सांड या गाय की टक्कर से लोग अपनी जान गंवा देते हैं लेकिन उनके परिवारों को कोई आर्थिक मदद नहीं मिल पाती। जस्टिस संजय करोल और एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस गंभीर मुद्दे पर चिंता जताते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को एक ठोस कंपनसेशन मेकेनिस्म बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि चाहे पीड़ित पैदल चल रहा हो या वाहन चला रहा हो, पशुओं के कारण होने वाले हादसों में मुआवजे के भुगतान के लिए नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाने चाहिए।
पशुओं की ‘टैगिंग’ होगी अनिवार्य और मालिक होंगे जिम्मेदार
सुप्रीम कोर्ट ने केवल मुआवजे की बात नहीं की बल्कि समस्या की जड़ पर भी प्रहार किया है। कोर्ट ने सभी पशुओं की अनिवार्य टैगिंग का निर्देश दिया है।
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इस टैगिंग से पशुओं की निगरानी करना आसान होगा। यह उनके स्वास्थ्य और टीकाकरण के लिए भी उपयोगी होगा क्योंकी इससे उनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य और टीकाकरण का रिकॉर्ड रखा जा सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब पशु मालिकों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पशु दिन खत्म होने पर अपने निर्धारित आवास पर लौट आएं।
एक विधवा की लंबी लड़ाई और न्याय की जीत
यह मामला तब चर्चा में आया जब एक महिला ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी जिसमें उसका 29.32 लाख रुपये का मुआवजा रद्द कर दिया गया था। इस महिला के पति की मौत सड़क पर चलते समय एक आवारा सांड की टक्कर से सिर में लगी चोट के कारण हुई थी। हालांकि सिंगल बेंच ने मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन खंडपीठ ने उसे पलट दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसी अपील पर सुनवाई करते हुए यह व्यापक निर्देश जारी किए हैं।
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कानून सिर्फ कागज पर न रहें- चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी राज्यों को कड़ा संदेश दिया है जिन्होंने मवेशियों से संबंधित कानून तो बनाए हैं, लेकिन उन्हें लागू नहीं किया। पीठ ने कहा कि राज्यों को इन कानूनों का अक्षरशः और तत्काल कार्यान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए। सरकारों को निर्देश दिया गया है कि वे सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से उचित नियम बनाएं ताकि भविष्य में ऐसे हादसों के पीड़ितों को दर-दर न भटकना पड़े।
यह फैसला न केवल सड़क सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है जो आवारा पशुओं के कारण होने वाली अनहोनी का शिकार होते हैं। अब यह सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों को कितनी जल्दी धरातल पर उतारती हैं।
