सुप्रीम कोर्ट (सोर्स- आईएएनएस)
Hate Speech Against Brahman: सर्वोच्च न्यायालय ने ब्राह्मण समुदाय को निशाना बनाकर दी जा रहीं ‘हेट स्पीचों’ पर कड़ी नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने कहा कि आप लोगो ने अब एक नया शब्द ढूंढ निकाला है ‘ब्राम्हिन फोबिया’। दरअसल, दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा कि एक समुदाय को निशाना बनाकर घृणास्पद टिप्पणियां की जा रही हैं। इस पर न्यायमूर्ति नागरत्ना ने स्पष्ट किया कि अदालत किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत भरी भाषा का समर्थन नहीं करती।
सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि यह मुद्दा शिक्षा, बौद्धिक विकास और सहिष्णुता पर निर्भर करता है। जब समाज में भाईचारा बढ़ेगा, तो ऐसी टिप्पणियां खुद ही खत्म हो जाएंगी इसलिए किसी एक समुदाय के लिए अलग मांग उचित नहीं।
सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि हम इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते। जस्टिस नागरत्ना ने आगे कहा कि अगर आप इस समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषणों के कारणों का अध्ययन करेंगे तो आपको कुछ जवाब मिल जाएंगे। याचिकाकर्ता ने कहा कि समाज में ऐसी धारणा प्रचलित है कि ब्राह्मणों द्वारा जातिगत भेदभाव फैलाया गया है। हालांकि ब्राह्मण समुदाय भी कई बार ऐसी परिस्थितियों का सामना कर चुका है और इसका सबसे अधिक असर आम लोगों पर पड़ता है। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि समाज में ऐसे हालात से ऊपर उठने की क्षमता मौजूद है, और लोगों को उसी ताकत का सकारात्मक उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने 9 साल तक रिसर्च की है। जिसके बाद यह याचिका दाखिल की गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि ब्राह्मणों के खिलाफ साजिश रची गई और सुनियोजित तरीके से इसे अंजाम दिया गया। इसमें कुछ विदेशी तत्वों की भूमिका भी हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में ऐसी सामग्री शामिल की जा रही है, जिससे ब्राह्मणों की नकारात्मक छवि पेश होती है।
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याचिका में अदालत से केंद्र और राज्य एजेंसियों द्वारा व्यापक जांच कराने की मांग की गई जिससे ऐसे समन्वित घरेलू या विदेशी अभियानों का पता लगाया जा सके। जिनका उद्देश्य जातिगत तनाव भड़काना या ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ लक्षित नफरत फैलाना है। इसके साथ ही केंद्र सरकार को एक उच्च-स्तरीय ‘सत्य और न्याय आयोग’ गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई, जो 1948 महाराष्ट्र और 1990 कश्मीरी पंडित घटनाओं की जांच कर उन्हें मान्यता दे तथा पीड़ितों और उनके वंशजों के पुनर्वास, आर्थिक व शैक्षिक सहायता पर सिफारिशें दे।